राज्यपाल ने ‘चिट्टे पर चोट’ राज्य स्तरीय कार्यशाला का उद्घाटन किया, ड्रग्स के खिलाफ सामूहिक संकल्प की अपील – भारत केसरी टीवी

राज्यपाल ने ‘चिट्टे पर चोट’ राज्य स्तरीय कार्यशाला का उद्घाटन किया, ड्रग्स के खिलाफ सामूहिक संकल्प की अपील

[MADAN SHARMA]

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राज्यपाल श्री शिव प्रताप शुक्ल ने आज गैर-सरकारी संगठनों के समूह ‘संजीवनी’ द्वारा आयोजित ‘वार ऑन ड्रग्स–चिट्टे पर चोट’ विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का उद्घाटन किया और हिमाचल प्रदेश में नशा-निरोध के लिए समन्वित एवं दृढ़ प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में पुलिस की कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ प्रभावित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि गैर-सरकारी संगठनों के साथ-साथ धार्मिक संस्थानों की भागीदारी भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि विदेशी एजेंसियों द्वारा संचालित हो रहे नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए समाज की सामूहिक भूमिका आवश्यक है।

 

राज्यपाल ने राज्य सरकार के नशा-निरोध प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विधानसभा में सत्ता और विपक्ष—दोनों का इस मुद्दे पर एकजुट होना सराहनीय है। उन्होंने कहा कि “सामूहिक राजनीतिक इच्छाशक्ति के बिना देवभूमि को इस संकट से उबार पाना संभव नहीं है।”

 

उन्होंने कहा कि ‘चिट्टे पर चोट’ केवल एक अभियान नहीं बल्कि एक संकल्प है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि संजीवनी न केवल जागरूकता फैला रही है, बल्कि नीति सुधार, क्षमता निर्माण, शोध, जनजागरूकता और सामुदायिक हस्तक्षेप जैसे क्षेत्रों में भी काम कर रही है। यह संस्था विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों को एक मंच देकर सरकार के साथ मिलकर नशा-निरोध, परामर्श, पुनर्वास, प्रशिक्षण और जमीनी स्तर की गतिविधियों को मजबूत कर रही है।

 

उन्होंने कहा कि “अगर ‘चिट्टे पर चोट’ अभियान को सफल बनाना है, तो संगठित प्रयास, योजनाबद्ध रणनीति और सामुदायिक भागीदारी अनिवार्य है।” meaningful बदलाव तभी संभव है जब समाज, मीडिया, धार्मिक संगठन, खेल संस्थान, स्वयंसेवी समूह और युवा क्लब एकजुट होकर आवाज उठाएं।

 

राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल को नशे से बचाने के लिए हर नागरिक को जागरूक और संवेदनशील होना होगा। युवाओं का नशे की चपेट में आना केवल किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की हार है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश, जो अपनी शांति, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है, वर्तमान में सिंथेटिक ड्रग्स जैसे ‘चिट्टा’ की वजह से गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है, लेकिन यह चुनौती अजेय नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी एजेंसियां, पुलिस, प्रशासन, पंचायतें, स्कूल-कॉलेज और सामाजिक संगठन साथ खड़े हों, तो हिमाचल को नशा-मुक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर शुरू किया गया उनका नशा-मुक्त अभियान समाज के हर वर्ग का समर्थन प्राप्त कर रहा है।

 

परिवार की भूमिका पर बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई घर से शुरू होती है। अभिभावकों को अपने बच्चों के व्यवहार, मित्रों और दिनचर्या पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने स्कूलों और कॉलेजों में नियमित जागरूकता अभियानों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। राज्यपाल ने नशा तस्करों और सप्लाई नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि नशा पीड़ितों को अपराधी नहीं, बल्कि मरीज समझना चाहिए और अस्पतालों, काउंसलिंग, मनोवैज्ञानिक सहायता तथा पुनर्वास केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

 

इससे पहले, संजीवनी समूह के अध्यक्ष महेंद्र धरमाणी ने राज्यपाल का स्वागत किया और कहा कि उनका मार्गदर्शन गैर-सरकारी संगठनों को और अधिक दृढ़ता से काम करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बताया कि 25 सितंबर 2025 को गठित संजीवनी ने सात जिलों में कार्यरत 17 संगठनों को एक मंच पर जोड़ा है। ‘चिट्टे पर चोट’ अभियान के माध्यम से ये संगठन नशे से जुड़े मुद्दों पर संवाद बढ़ाएंगे, विशेषज्ञ सुझाव गांव स्तर तक पहुंचाएंगे और व्यापक सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि यह राज्य में पहली बार है कि नागरिक समाज इस तरह संगठित प्रयास कर रहा है।

 

संजीवनी समूह के सचिव नरेश शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

 

सलाहकार जोगिंदर कंवर, उपाध्यक्ष नितिन व्यास और डॉ. जोगिंदर सकलानी, डीआईजी पुलिस दिग्विजय नेगी, वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष वर्मा, ओ.पी. शर्मा और डॉ. निधि शर्मा सहित अनेक प्रमुख लोग विशेषज्ञों के रूप में उपस्थित रहे।#चिट्टेपरचोट #नशामुक्तहिमाचल #WarOnDrugs #हिमाचलन्यूज़ #GovernorHP #SanjeevaniNGO

 

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