पीएम मोदी ने रेणुका ठाकुर की मां को किया प्रणाम, बोले—सिंगल मदर ने कठिन हालात में गढ़ी बेटी की सफलता की कहानी – भारत केसरी टीवी

पीएम मोदी ने रेणुका ठाकुर की मां को किया प्रणाम, बोले—सिंगल मदर ने कठिन हालात में गढ़ी बेटी की सफलता की कहानी

[MADAN SHARMA]

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विश्वकप 2025 का खिताब जीतकर इतिहास रचने वाली भारतीय महिला टीम ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने टीम को शानदार जीत की बधाई दी और उनके प्रदर्शन की सराहना की। इस दौरान खिलाड़ियों ने पीएम मोदी के साथ कई यादगार लम्हे साझा किए। प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान भारतीय तेज गेंदबाज एवं हिमाचल की बेटी रेणुका सिंह ठाकुर का एक वीडियो दिखाया गया जिसमें वो कहती नजर आईं, ‘ड्रेसिंग रूम का माहौल हल्का रखना था तो सोचा कि क्या करें, तब मैंने मोर बनाया क्योंकि यह सकारात्मकता का प्रतीक है।’ प्रधानमंत्री ने वीडियो देखने के बाद कहा कि आपने यहां आते हुए भी मोर देखे होंगे। इस पर रेणुका ने कहा, ‘हां देखे और मुझे सिर्फ मोर ही बनाता आता था तो मैंने वही बनाया।’ इस पर जेमिमा रॉड्रिग्स ने कहा, ‘इसके बाद रेणुका चिड़िया बना रही थी, लेकिन हम लोगों ने मना कर दिया।’ बाद में प्रधानमंत्री ने रेणुका के लिए कहा, ‘आपकी माताजी को मैं विशेष रूप से प्रणाम करूंगा कि इतनी कठिन जिंदगी में से उन्होंने आपकी प्रगति के लिए इतना बड़ा योगदान दिया। सिंगल पैरेंट्स होने के बावजूद उन्होंने आपकी जिंदगी को बनाने के लिए इतना किया। एक मां इतनी मेहनत करे और अपनी बेटी के लिए करे, यह अपने आप में बड़ी बात है। मेरी तरफ से उन्हें प्रणाम कहिएगा।’

दो साल की उम्र में पिता का सिर से साया उठने के बाद अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रेणुका ठाकुर का क्रिकेट का सफर संघर्षपूर्ण रहा। पिता की मौत के बाद माता सुनिता ने कई साल तक जल शक्ति विभाग में चतुर्थ श्रेणी सेवाएं देकर बच्चों का पालन-पोषण किया। चाचा भूपिंद्र ठाकुर की एक पहल ने रेणुका के जीवन को बदल कर रख दिया। रेणुका ठाकुर गांव के स्कूल में पढ़ती थीं। एक शाम रेणुका कपड़े की गेंद से छोटे से मैदान में लकड़ी का बल्ला और डंडों की विकेट बनाकर लड़कों के साथ खेल रहीं थीं। चाचा भूपिंद्र ठाकुर कॉलेज में उस समय प्राध्यापक तैनात थे। उन्हें यह पता तक नहीं था कि यह बच्ची उनके चचेरे भाई की है।

उन्होंने बच्चों के हाथ से बैट लेकर रेणुका से गेंदबाजी करने के लिए कहा। रेणुका की गेंदबाजी को देखकर उन्होंने पूछा कि किसकी बेटी हो। इसके बाद पता चला कि वह उनके चचेरे भाई स्व. केहर सिंह ठाकुर की बेटी है। उन्होंने उसी दिन से रेणुका को क्रिकेट अकादमी धर्मशाला के लिए भेजने की पहल शुरू की। 13 साल की उम्र में रेणुका का धर्मशाला के लिए चयन हो गया। पिता केहर सिंह भी क्रिकेट के शाैकीन थे। वह पूर्व क्रिकेट विनोद कांबली के बहुत बड़े फैन रहे। उनका सपना था कि उनका का भी एक बच्चा क्रिकेट में आगे आए। 2019 से रेणुका ने धर्मशाला अकादमी में कोच से क्रिकेट की बारीकियां सीखना शुरू कीं। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। पारसा पंचायत के प्रधान गणेश दत्त शर्मा शर्मा का कहना है कि रेणुका ने पारसा गांव का नाम पूरे देश में चमकाया है। रोहड़ू के लोगों को आज इस बेटी पर गर्व है।

उन्होंने टीम इंडिया, इंडिया वुमन ग्रीन, इंडिया वुमन बोर्ड प्रेजिडेंट और इंडिया बी वुमन का प्रतिनिधित्व किया है। वो बीसीसीआई के महिला एक दिवसीय टूर्नामेंट 2019 में सबसे अधिक विकेट लेने वाली गेंदबाज बनीं। बता दें कि इस टूर्नामेंट में कमाल की गेंदबाजी करते हुए उन्होंने 23 विकेट चटकाए थे। इसके बाद रेणुका को टीम इंडिया से खेलने का मौका मिला। वह सात अक्तूबर 2021 का दिन था, जब रेणुका को भारतीय टीम से खेलने का मौका मिला। राष्ट्रमंडल खेलों में रेणुका ने यादगार प्रदर्शन किया। रेणुका ने पांच मैचों में 11 विकेट लिए। आईसीसी ने हाल ही में रेणुका को अपनी वनडे और टी-20 टीम में स्थान दिया है। इसके अलावा साल 2022 की उभरती खिलाड़ी का पुरस्कार भी रेणुका को दिया गया। पहले महिला आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर ने रेणुका को 1.40 करोड़ में अपनी टीम का हिस्सा बनाया।

रेणुका सिंह ठाकुर को बचपन में क्रिकेट का बहुत शौक था और वह अपने मोहल्ले के लड़कों के साथ घर में बने लकड़ी के बल्ले और कपड़े की गेंदों से खेलती थीं। रेणुका की मां सुनीता ने यह भी बताया कि उनके दिवंगत पति क्रिकेट प्रेमी थे और चाहते थे कि रेणुका इस खेल में अच्छा प्रदर्शन करे।  सुनीता ने सोमवार को कहा, ‘मेरे पति क्रिकेट के बहुत बड़े प्रशंसक थे और चाहते थे कि बच्चों में से कोई एक खेल या कबड्डी चुने और भले ही वह हमारे साथ नहीं हैं, मेरी बेटी ने उनके सपने पूरे किए हैं।’ रेणुका को हमेशा से क्रिकेट का शौक था और वह बचपन से ही लड़कों के साथ यह खेल खेलती थी।  छोटी बच्ची के रूप में, वह सड़क किनारे कपड़े की गेंद बनाकर लकड़ी के बल्ले से खेला करती थी। रेणुका के पिता केहर सिंह ठाकुर, जो राज्य के सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थे, का निधन तब हुआ जब वह मात्र तीन वर्ष की थीं। वह अपने शरीर पर बने पिता के टैटू से खेलती थीं।

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