आईसीएआर प्रायोजित शीतकालीन विद्यालय में कृषि उद्यम मॉडल और सप्लाई चेन अनुकूलन पर मंथन – भारत केसरी टीवी

आईसीएआर प्रायोजित शीतकालीन विद्यालय में कृषि उद्यम मॉडल और सप्लाई चेन अनुकूलन पर मंथन

[MADAN SHARMA]

Advertisement

 

Advertisement

 

Advertisement

नौणी में आईसीएआर शीतकालीन विद्यालय में कृषि उद्यमिता एवं वैल्यू चेन पर फोकस

Advertisement

डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में ‘प्रसंस्करण एवं अनुकूलित मूल्य शृंखलाओं के माध्यम से बागवानी फसलों में कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देना’ विषय पर 21 दिवसीय आईसीएआर प्रायोजित शीतकालीन विद्यालय का हाल ही में समापन हुआ। इस कार्यक्रम का आयोजन खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किया गया। इस प्रशिक्षण में ओडिशा, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, गुजरात और हिमाचल प्रदेश से 10 विश्वविद्यालयों एवं दो कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के कुल 19 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

सोमवार को आयोजित समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने बागवानी एवं संबद्ध क्षेत्रों में समकालीन शोध योग्य विषयों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम मूल्य संवर्धन, फसलोपरांत प्रबंधन, आपूर्ति शृंखला अनुकूलन तथा परिपत्र अर्थव्यवस्था ढांचे पर सार्थक एवं गंभीर विमर्श को प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एवं वैश्विक प्राथमिकताओं के अनुरूप साक्ष्य-आधारित और बाजार उन्मुख कृषि उद्यमिता मॉडल विकसित करने के लिए इस प्रकार के विचार-विमर्श अत्यंत आवश्यक हैं।

प्रो. चंदेल ने विश्वास व्यक्त किया कि शीतकालीन विद्यालय के दौरान प्रदान किया गया ज्ञान और अर्जित कौशल टिकाऊ बागवानी उद्यमों के विस्तार योग्य मॉडलों में परिवर्तित होंगे, जिससे कृषक समुदाय की आय में वृद्धि तथा कृषि-खाद्य प्रणालियों की सुदृढ़ता सुनिश्चित होगी। उन्होंने नवाचार-प्रेरित, सामाजिक रूप से उत्तरदायी और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ कृषि उद्यमियों को विकसित करने की विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराई, जो समावेशी ग्रामीण विकास तथा राष्ट्रीय खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में सार्थक योगदान दे सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि वैज्ञानिकों को किसान उत्पादक संगठनों (एफपीसी) के साथ मिलकर कार्य करना चाहिए तथा उनके यूएसपी की पहचान और विकास में सहयोग देना चाहिए, ताकि उनकी बाज़ार प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सके। साथ ही उन्होंने प्रत्येक विकसित तकनीक के कार्बन फुटप्रिंट का आकलन करने पर बल दिया, जिससे पर्यावरणीय स्थिरता एवं जलवायु-संवेदनशील कृषि पद्धतियों के अनुरूप विकास सुनिश्चित हो सके।

इस अवसर पर अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य ने कहा कि बागवानी मूल्य शृंखला में दक्षता, गुणवत्ता और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्नत प्रसंस्करण तकनीकों एवं अभिनव मूल्य संवर्धन रणनीतियों की समझ को सुदृढ़ करते हैं। परिपत्र अर्थव्यवस्था दृष्टिकोण का व्यावहारिक अनुभव उद्यमशील दक्षता, व्यवसाय योजना कौशल तथा बाज़ार समझ को भी सशक्त बनाता है।

पाठ्यक्रम निदेशक एवं खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश शर्मा ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बागवानी क्षेत्र से जुड़े हितधारकों की बौद्धिक, तकनीकी एवं उद्यमशील क्षमताओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से रणनीतिक रूप से तैयार किया गया था। उन्होंने कहा कि शीतकालीन विद्यालय ने अंतर्विषयक नेटवर्किंग, सहयोगात्मक अनुसंधान एवं संस्थागत साझेदारी को बढ़ावा देने के साथ-साथ मूल्य संवर्धन, फसलोपरांत प्रबंधन, आपूर्ति शृंखला अनुकूलन एवं परिपत्र अर्थव्यवस्था पर सार्थक चर्चा को प्रोत्साहित किया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों के लिए विश्वविद्यालय मॉडल फार्म, प्राकृतिक खेती मॉडल, हिमएग्री सॉल्यूशंस यूनिट, दिलमन डेलिकेसीज़, मिन्चीज़, मशरूम निदेशालय, केवीके कंडाघाट तथा विश्वविद्यालय के मशोबरा केंद्र में विशेषज्ञ व्याख्यान एवं शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किए गए, जिससे उन्हें प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी, उद्यम मॉडल एवं मूल्य शृंखला अनुकूलन का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे
Donate Now
               
हमारे  नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट , और सभी खबरें डाउनलोड करें
डाउनलोड करें

जवाब जरूर दे 

2027 में कौन होगा हिमाचल का मुख्य मंत्री

View Results

Loading ... Loading ...


Related Articles

Close
Facebook Instagram Twitter Youtube Whatsapp
Website Design By Mytesta.com +91 8809666000