आपदा में लोगों की मदद करेगा मोबाइल रोबोट, मंडी IIT के इंजीनियरों ने किया तैयार, इनसानों का स्मार्ट साथी बनेगी मशीन – भारत केसरी टीवी

आपदा में लोगों की मदद करेगा मोबाइल रोबोट, मंडी IIT के इंजीनियरों ने किया तैयार, इनसानों का स्मार्ट साथी बनेगी मशीन

[ मदन शर्मा]

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इनसान ऐसे साथी की तलाश में भटकता रहता है, जो उसकी फिलिंग को समझ सके और उसके अनुसार भावनात्मक जुड़ाव महसूस करवा सके। मंडी आईआईटी में विकसित किए जा रहे रोबोट इनसानों के स्मार्ट साथी बनेंगे। मोबाइल रोबोट आपदा में इंसानी जीवन बचाने को तैयार किए जा रहे हैं। ह्यूमनॉइड रोबोट निपटाएगा घरेलु काम निपटाते हुए नजर आएंगे तथा ब्रेन वेव कंट्रोल्ड रोबो अस्पताल में मरीजों की देखभाल करेंगे। मंडी आईआईटी के सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स रिर्सच बिंग की मोबाइल रोबोटिक्स लैब में एनर्जी हार्वेस्टिंग वाले मोबाइल रोबोट बनाए जा रहे हैं। यह खुद ही बिजली पैदा कर सकते हैं। यह एक खास प्रोजेक्ट है। इसमें मल्टी एजेंट रोबोट सिस्टम है। इसमें एक ग्राउंड व्हीकल और एक एरियल व्हीकल है, जो साथ काम करते हैं। यह दोनों आपस में कम्युनिकेशन करते हैं। रास्ते की बाधाएं पार करते हैं और आपदा क्षेत्र में राहत सामग्री पहुंचाते हैं। प्रोफेसर अमित शुक्ला की टीम ने दो साल की मेहनत से इसे तैयार किया। इसमें रोबो एक साथ काम करते हैं।

एक जमीन पर चलने वाला और दूसरा हवा में उडऩे वाला। यह एक-दूसरे को को-ऑर्डिनेट करते हैं। यह सिस्टम न सिर्फ आपदा में मदद करेगा, बल्कि रक्षा और औद्योगिक वेयरहाउस में भी काम आएगा। ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स टीम रीइंफोर्समेंट लर्निंग का इस्तेमाल कर बाइपेड दो पैरों वाले रोबोट बना रही है। यह चल सकता है, दौड़ और कूद भी सकते हैं। रोबोटिक्स स्वीडन की कंपनी के साथ पार्टनरशिप में सोशल रोबोट बनाए जा रहे हैं। यह मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा और लाइब्रेरी में इस्तेमाल होगा। ब्रेन वेव कंट्रोल्ड रोबोट हेल्थकेयर में इस्तेमाल होते हैं। एक स्मार्ट रोबोटिक असिस्टेंट मोबाइल बेस दस किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलता है।

इनसानी जरूरतों को पूरा करेंगे

आईआईटी मंडी के रोबोटिक्स प्रोग्राम्स के प्रमुख प्रोफेसर नरेंद्र कुमार धर बताते हैं कि ऐसे रोबोट बनाए जा रहे हैं, जो इनसानी जीवन को सुविधा जनक बना सके। हर क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए ही रोबोट बनाए जा रहे हैं। रोबोट को जैसा सिखाएंगे वैसा ही काम करेगा। यह अस्पताल के ओटी से लेकर युद्ध तक काम करेगा। आईआईटी मंडी की 12 सदस्यीय टीम ने आर्टिफिशियल ई-स्किन विकसित की है। यह एक ऐसी कृत्रिम त्वचा है, जो रोबोटिक हाथ को असली हाथ जैसा अनुभव देती है। यह तापमान, दबाव, सतह और बनावट को महसूस कर सकती है।

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