हिमाचल HC सख्त: गृह जिले में तैनाती पर रोक के निर्देश, ट्रांसफर नीति में पारदर्शिता लाने के आदेश – भारत केसरी टीवी

हिमाचल HC सख्त: गृह जिले में तैनाती पर रोक के निर्देश, ट्रांसफर नीति में पारदर्शिता लाने के आदेश

[MADAN SHARMA]

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गृह जिला में तैनाती पर HC सख्त, सरकार को स्टेट कैडर कर्मचारियों की तबादला नीति में नए प्रावधान करने के आदेश

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हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्टेट कैडर से जुड़े कर्मचारियों से जुड़ी स्थानांतरण नीति में ऐसे प्रावधान शामिल करने के आदेश दिए हैं, जिनके अनुसार ऐसे कर्मचारी अपनी प्रारंभिक नियुक्ति के बाद कम से कम दो या तीन लगातार नियुक्तियों तक, अपने गृह जिला में तैनात न किए जाएं। यदि कोई राज्य-कैडर कर्मचारी पहले से ही अपने गृह जिला में तैनात रहा हो, तो उसका स्थानांतरण उसी जिला के भीतर किसी अन्य स्थान पर न किया जाए। तैनाती के दो स्थानों के बीच न्यूनतम दूरी 100-150 किलोमीटर तक होनी चाहिए, ताकि भेदभाव और पक्षपात की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो सके। इसके अलावा न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने सरकार को आदेश दिए हैं कि वह सभी कर्मचारियों की तैनाती संबंधी जानकारी को ऑनलाइन उपलब्ध कराने की संभावना पर भी विचार करे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसी विशेष कर्मचारी ने किसी विशेष स्थान पर कुल कितनी सेवा अवधि पूरी की है। इसके लिए एक ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि जब कोई कर्मचारी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किसी स्थान पर तीन वर्ष या दो वर्ष अथवा उससे अधिक की सेवा अवधि पूरी कर ले, तो उसका नाम किसी लाल बिंदु या संकेत के माध्यम से विशेष रूप से प्रदर्शित हो। इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि उक्त कर्मचारी ने उस स्थान पर अपनी सामान्य (या निर्धारित) सेवा अवधि पूरी कर ली है। यह अवधि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए तीन वर्ष तथा अन्य कर्मचारियों के लिए दो वर्ष निर्धारित की जा


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सकती है। इसके अतिरिक्त, ऑनलाइन माध्यम पर विभिन्न स्थानों (स्टेशनों) पर रिक्त पदों की उपलब्धता भी प्रदर्शित की जानी चाहिए, ताकि विभाग द्वारा कर्मचारियों का स्थानांतरण पूर्णत: पारदर्शी तरीके से किया जा सके। ऐसा करना इसलिए आवश्यक है, ताकि स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर व्याप्त इस धारणा को दूर किया जा सके कि यह प्रक्रिया मात्र एक उद्योग (या व्यवसाय) बनकर रह गई है। मुख्य सचिव को कोर्ट द्वारा की गई इन टिप्पणियों के संबंध में अपना जवाब प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं और इस बाबत मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल, 2026 को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि न्यायालय इस बात से सचमुच दुखी है कि याचिकाकर्ता जैसे कर्मचारी अपनी नियुक्ति वाली जगह पर ही हमेशा के लिए जमे रहना चाहते हैं और वे किसी दूसरी जगह नहीं जाना चाहते, जहां पद खाली हों। इससे विभाग के लिए अपने कामकाज का प्रबंधन करना बेहद मुश्किल हो जाता है। कोर्ट ने कहा कि राज्य कैडर का कोई भी कर्मचारी यह मानकर नहीं चल सकता कि उसे अपने घर के आस-पास ही सेवा करने का कोई निहित अधिकार प्राप्त है, जैसा कि आमतौर पर कर्मचारियों की आदत बन गई है। मामले के अनुसार याचिकाकर्ता अगस्त 2019 से लगातार मंडी में ग्रामीण विकास विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत है। सिवाय एक छोटे से अंतराल के बाद उसका तबादला भुंतर कर दिया गया था, लेकिन उस तबादले की अवधि के दौरान भी उसने असल में मंडी में ही काम करना जारी रखा और तबादला आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

 

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