भारतीय शिक्षा परंपरा ज्ञान, संस्कार और समग्र विकास पर आधारित : राज्यपाल – भारत केसरी टीवी

भारतीय शिक्षा परंपरा ज्ञान, संस्कार और समग्र विकास पर आधारित : राज्यपाल

[MADAN SHARMA]

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शिमला,

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राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा हमेशा ज्ञान, मूल्यों और चरित्र निर्माण के समन्वय पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि भारत में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत उन्नति के लिए ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए भी करें।

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राज्यपाल धर्मशाला में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हिमाचल प्रदेश के 9वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्वर्ण पदक विजेताओं और डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह गर्व की बात है कि 32 छात्रों को गोल्ड मेडल दिए गए, जिनमें 23 मेधावी छात्राएं शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के विजन की सफल परिणति को दर्शाता है, क्योंकि आज बेटियां शिक्षा, शोध और नवाचार में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर रही हैं।

दीक्षांत समारोह में विभिन्न विषयों में कुल 511 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं।

राज्यपाल ने भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि हिमाचल में स्वागत करते हुए कहा कि उनका धर्मशाला में आयोजित केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होना गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं होता, बल्कि यह जीवन के एक महत्वपूर्ण चरण की पूर्णता और नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि यह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि अर्जित ज्ञान को समाज और राष्ट्र की सेवा में लगाने की शुरुआत है। यह उपलब्धि केवल स्नातकों की व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि समाज और देश के प्रति उनकी जिम्मेदारियों का भी प्रतीक है।

राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह नीति शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी, बहुविषयक और कौशल आधारित बनाने का लक्ष्य रखती है।

उन्होंने विश्वविद्यालय को भारतीय ज्ञान परंपरा पर 34 महत्वपूर्ण पुस्तकों के प्रकाशन तथा संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं, विशेषकर पंजाबी और डोगरी, में पुस्तकों के अनुवाद के लिए भी बधाई दी। इससे भारतीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन में मदद मिल रही है।

उन्होंने यह भी प्रसन्नता व्यक्त की कि विश्वविद्यालय को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से स्वायत्तता प्राप्त हुई है।

इस अवसर पर कृषि मंत्री चंद्र कुमार, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, सांसद अनुराग सिंह ठाकुर और राजीव भारद्वाज, कुलाधिपति हरमोहींदर सिंह बेदी तथा कुलपति सत प्रकाश बंसल सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, छात्र और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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