अभूतपूर्व बादल फटने और पिघलते ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन का संकेत: मुख्यमंत्री सुक्खू – भारत केसरी टीवी

अभूतपूर्व बादल फटने और पिघलते ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन का संकेत: मुख्यमंत्री सुक्खू

[MADAN SHARMA]

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शिमला,

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मुख्यमंत्री Thakur Sukhvinder Singh Sukhu ने आज ‘Scientific Assessment of Tackling Non-CO2 Emissions: Pathways for Himachal Pradesh’ शीर्षक रिपोर्ट जारी की। इस अवसर पर उनके समक्ष M/s Dabur India Limited और M/s Karan Singh Vaidh, सोलन के साथ राज्य में औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण को बढ़ावा देने हेतु दो समझौता ज्ञापनों (MoA) पर हस्ताक्षर किए गए।

 

समझौते के तहत Dabur India Limited प्रतिवर्ष 12 लाख गुणवत्तायुक्त पौधे (प्रति प्रजाति एक लाख) किसानों को उपलब्ध कराएगी और दस वर्षों में कुल 1.20 करोड़ पौधे (प्रति प्रजाति 10 लाख) वितरित किए जाएंगे।

लो और मिड-हिल क्षेत्रों (ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, सिरमौर और निचला शिमला) में आंवला, हरड़, बहेड़ा, काकड़सिंगी और लोधरा वितरित किए जाएंगे।

मिड से हाई-हिल क्षेत्रों (कुल्लू, चंबा, मंडी, ऊपरी शिमला और किन्नौर) में जटामांसी, कुटकी, सुगंधबाला, पदम काष्ठ और पुष्करमूल दिए जाएंगे।

उच्च पर्वतीय क्षेत्रों (किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा) में अतीस और विष जैसी अल्पाइन प्रजातियां उपलब्ध कराई जाएंगी।

 

दूसरा MoA M/s Karan Singh Vaidh, सोलन के साथ पांच वर्षों के लिए किया गया है, जिसके तहत सोलन जिले में हल्दी (Curcuma longa), अश्वगंधा (Withania somnifera), शतावरी (Asparagus racemosus), तुलसी (Ocimum sanctum), चिरायता (Swertia chirayita) और हिमालयन जेंटियन (Gentiana kurroo) की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रारंभिक चरण में 108 बीघा भूमि पर कम से कम 225 महिला किसानों को शामिल किया जाएगा।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को देश का पहला ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस वर्ष 200 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है और युवाओं को सौर परियोजनाएं स्थापित करने हेतु सब्सिडी प्रदान की जा रही है।

 

उन्होंने बताया कि नालागढ़ में Oil India Limited के सहयोग से एक मेगावाट का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में हिमाचल प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में अग्रणी राज्य बनेगा।

 

राज्य सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भी बढ़ावा दे रही है। अप्रैल तक Himachal Road Transport Corporation (HRTC) के बेड़े में लगभग 300 नई ई-बसें शामिल की जाएंगी। 38,000 टैक्सियों को ई-टैक्सी में परिवर्तित करने के लिए 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण राज्य में अभूतपूर्व बादल फटना, फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और ग्लेशियरों का सिकुड़ना जैसी घटनाएं बढ़ी हैं, जो गंभीर चेतावनी हैं। वर्ष 2023 की आपदा में 23,000 से अधिक घर नष्ट हुए थे।

 

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश केवल भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि हिमालय की आत्मा है। इसके ग्लेशियर, नदियां, वन और पर्वत लाखों लोगों के जीवन का आधार हैं। हिमालय में किसी भी प्रकार की क्षति के दुष्परिणाम पूरे देश को भुगतने पड़ सकते हैं।

 

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के लंबित बकाया का समाधान किए बिना किशाऊ और रेणुका बांध जैसी परियोजनाओं पर आगे नहीं बढ़ा जाएगा। इस मुद्दे पर कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं।

 

इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार, हरीश जनारथा, सचिव (पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन) एस.के. सिंगला सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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