आरडीजी पर सियासी संग्राम: “हमारा हक है, खैरात नहीं” — बोले सुखविंदर सिंह सुक्खू, विपक्ष को दी खुली चुनौती – भारत केसरी टीवी

आरडीजी पर सियासी संग्राम: “हमारा हक है, खैरात नहीं” — बोले सुखविंदर सिंह सुक्खू, विपक्ष को दी खुली चुनौती

[ MADAN SHARMA]

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*आरडीजी हमारा हक है, खैरात नहीं, मुख्यमंत्री सुक्खू बोले, अभी कमियां गिनने का वक्त नहीं*

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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा बजट सत्र के पहले दिन नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की आपत्ति पर आरडीजी को लेकर सदन में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान राज्य का हक है, खैरात नहीं। सीएम ने कहा कि विपक्ष विचित्र स्थिति में फंस गया है। आरडीजी बंद होने की बाद की भयंकर स्थिति को समझ भी रहा है और उससे भाग भी रहा है। हमने राजभवन से विशेष सत्र का आग्रह किया था, लेकिन विपक्ष राज्यपाल से पहले मिल लिया। अब बंद कमरे में क्या हुआ, इसका पता नहीं है। उसके बाद बजट सत्र की घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष मुझे जिद्दी बोलते हैं, जबकि मैं इनकी भी सुनता हूं और प्रदेश की जनता की भी सुनता हूं।

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यदि प्रदेश के अधिकारों का हनन होगा, हक छीना जाएगा, तो बोलना पड़ेगा। विपक्ष एक बात का जवाब दे। यदि आरडीजी पर पीएम के पास जाने को तैयार हैं, तो यह संकल्प प्रस्ताव अभी खत्म कर सकते हैं। सीएम ने कहा कि जनता की आवाज हमारी प्राथमिकता है। जनता के लिए पक्ष और विपक्ष को एक होना पड़ता है। हम इस लड़ाई को भी युद्ध की तरह लड़ेंगे और जनता से मिलकर जीतेंगे भी। भाजपा विधायकों ने कई बार काम रोको प्रस्ताव लाए।

फिर खुद ही वाकआउट भी कर गए, लेकिन यह वाकआउट का सब्जेक्ट नहीं है। भारत सरकार में 17 मार्च को बजट पास होना है। उससे पहले वित्त आयोग की सिफारिशें रखी जाएंगी।

इसलिए हम संकल्प प्रस्ताव पारित कर भारत सरकार भेजना चाहते हैं। यह क्यों हुआ, कैसे हुआ, अभी गलतियां गिनने का वक्त नहीं है। मुख्यमंत्री ने संकल्प प्रस्ताव को पारित कर चर्चा में भाग लेने का आग्रह भी किया। इसके बाद रूलिंग देते हुए स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने मेरे ध्यान में यह मामला लाया है, लेकिन मैं रिकार्ड से यह बताना चाहूंगा कि 2020 में उनके मुख्यमंत्री रहते हुए भी राज्यपाल अभिभाषण के बाद सदन की कार्यवाही चली है।

वैसे भी सदन को सात बजे तक चलना है और हमारे पास संकल्प प्रस्ताव के रूप में बिजनेस भी है। जनता के हित के इस मसले पर चर्चा की जा सकती है। स्पीकर ने कहा कि इस तरह के संकल्प प्रस्ताव के लिए तीन दिन का नोटिस देना होता है, लेकिन स्पीकर को इस समय में छूट देने की शक्तियां हैं। खासकर जब मामला लोकहित से जुड़ा हो। स्पीकर ने यह भी कहा कि 102 के संकल्प प्रस्ताव पर वोटिंग होती है, इसलिए अभिभाषण के दौरान इस पर चर्चा नहीं हो सकती।

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