RDG खत्म करने पर CM सुक्खू का हमला: “मुझे निशाना बनाने के बजाय PM से मिलें भाजपा नेता” – भारत केसरी टीवी

RDG खत्म करने पर CM सुक्खू का हमला: “मुझे निशाना बनाने के बजाय PM से मिलें भाजपा नेता”

[ MADAN SHARMA]

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दिल्ली से शिमला लौटने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (RDG) की समाप्ति के मुद्दे पर भाजपा नेताओं को राज्य के हितों की पैरवी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 2026 से 2031 के बीच RDG बंद होने से प्रदेश को हर साल लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा, जिससे जनता अपने अधिकारों से वंचित हो जाएगी।

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मुख्यमंत्री ने कहा, “मुझे निशाना बनाने के बजाय भाजपा नेताओं को प्रधानमंत्री से मिलकर RDG बहाल करवाने की मांग करनी चाहिए। मैंने कई बार उन्हें एकजुट होकर इस मुद्दे पर आगे आने का आग्रह किया है, लेकिन मुझे पता है कि वे ऐसा नहीं करेंगे।”

उन्होंने बताया कि नई दिल्ली में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम से मुलाकात के दौरान 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट पर प्रदेश का पक्ष रखा गया और इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा की गई। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली भाजपा सरकार से 75,000 करोड़ रुपये का कर्ज और 10,000 करोड़ रुपये के वेतन व पेंशन बकाया की भारी वित्तीय स्थिति विरासत में मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार विरोधी सख्त कदमों और व्यवस्थागत सुधारों के कारण पिछले तीन वर्षों में 3,800 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की गई है। श्री चिदंबरम ने इन प्रयासों की सराहना की और मामले को औपचारिक रूप से उठाने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज मांगे। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 275(1) के तहत RDG एक संवैधानिक प्रावधान है, जो राज्यों की आय-व्यय संतुलन के लिए बनाया गया है और पहाड़ी व छोटे राज्यों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश को 54,296 करोड़ रुपये RDG मिला, जबकि वर्तमान सरकार को तीन वर्षों में केवल 17,563 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके अलावा पिछली सरकार को 16,000 करोड़ रुपये GST मुआवजा और 2020-21 में 11,431 करोड़ रुपये अंतरिम अनुदान मिला था। उन्होंने कहा, “भाजपा के पांच वर्षों में करीब 70,000 करोड़ रुपये मिले। अगर 40,000 करोड़ का कर्ज चुका दिया जाता तो प्रदेश कर्ज के जाल में नहीं फंसता। जयराम ठाकुर बताएं कि यह राशि कहां खर्च हुई और किसे फायदा हुआ?”

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने फिजूलखर्ची पर रोक लगाई है, अनुत्पादक खर्च कम किया है और युवाओं के लिए रोजगार सृजन की दिशा में काम किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी पद समाप्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों के बकाया का भुगतान कर दिया गया है। साथ ही 1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2021 के बीच सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण के बकाया भी जारी किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए IAS, IPS और IFS कैडर में कटौती की गई है। IFS के पद 110 से घटाकर 86 किए गए हैं। प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए उच्च पदों में कटौती और निचले स्तर के पदों में वृद्धि की गई है।

उन्होंने कहा कि खर्च कम करने के लिए कुछ कॉलेजों और स्कूलों का विलय किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के अध्ययन के अनुसार हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को लगभग 90,000 करोड़ रुपये का पारिस्थितिकीय योगदान देता है। “हमारे संसाधनों पर हमारा वैध अधिकार है और हम इसके लिए लड़ते रहेंगे,” उन्होंने कहा।

मुख्यमंत्री ने “व्यवस्था परिवर्तन” के माध्यम से प्रदेश के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया

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