होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंचे दो और LPG टैंकर, गैस संकट से मिलेगी राहत – भारत केसरी टीवी

होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंचे दो और LPG टैंकर, गैस संकट से मिलेगी राहत

[MADAN SHARMA]

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होर्मुज स्ट्रेट में भारत का डंका, दो और LPG टैंकरों ने पार की बड़ी बाधा, गैस संकट से मिलेगी मुक्ति

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भारत आ रहे दो और एलपीजी टैंकरों ने पार की सबसे बड़ी बाधा, देश को गैस संकट से मिलेगी मुक्ति

अमरीका, इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग के 30वें दिन भारत के एक बड़ी खुशखबरी आई है। भारत आ रहे दो एलपीजी टैंकरों ने रविवार को होर्मुज स्ट्रेट पार कर लिया है। इन जहाजों पर 94 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लदी हुई है। बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम नाम के इन जहाजों को भारतीय नौसेना सुरक्षा दे रही है। सरकार के मुताबिक, ये दोनों टैंकर इसी हफ्ते मुंबई पहुंच सकते हैं। इससे पहले चार भारतीय झंडे वाले एलपीजी टैंकर भी इस अहम समुद्री रास्ते को पार कर चुके हैं, जबकि तीन अन्य अभी पश्चिमी हिस्से में हैं। सरकार ने बताया कि कुल 18 भारतीय जहाज और 485 भारतीय नाविक अभी भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक है। देश की करीब 60 फीसदी जरूरत आयात से पूरी होती है, जिसमें से 90 फीसदी मिडल ईस्ट से आता है। ईरान-अमरीका, इजरायल युद्ध के 30वें दिन ईरान ने अमरीका के साथ बातचीत के लिए सशर्त सहमति दे दी है। यह बातचीत पाकिस्तान के जरिए कराने का प्रस्ताव है। यह कदम जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक पहल माना जा रहा है। हालांकि उसने कुछ अहम शर्तें रखी हैं। इनमें सबसे जरूरी है कि उस पर हो रहे हमले तुरंत रोके जाएं और अमरीका और इजरायल यह भरोसा दें कि आगे कोई हमला नहीं होगा। इस मुद्दे पर रविवार को इस्लामाबाद में चार देशों के बीच उच्च स्तरीय बैठक हुई है, जो सोमवार को भी जारी रहने की उम्मीद है।

इन चार देशों में पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र शामिल हैं। इन देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत में मध्यस्थता का रोडमैप तैयार किया जा रहा है। ईरान पहले अमरीका की ओर से दिए गए 15 सूत्रीय समझौते को मानने से इनकार कर चुका है और अब वह चाहता है कि अमरीका उसकी पांच शर्तें मान ले, तभी वह वापस वार्ता की मेज पर लौटेगा। ईरान चाहता है कि तुरंत ही हमले बंद कर दिए जाएं। भविष्य में हमले न करने की गारंटी के साथ पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र यह सुनिश्चित करें कि अमरीका ईरान की चिंताओं को गंभीरता से सुने। ईरान की नई डिमांड यह है कि वह होर्मुज पर अपना पूरा नियंत्रण चाहता है। अगर अमरीका इन शर्तों को मान लेता है, तो अस्थायी युद्धविराम हो सकता है और ईरान औपचारिक रूप से बातचीत में शामिल हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक अगर इस्लामाबाद बैठक में सकारात्मक नतीजे निकलते हैं, तो 31 मार्च से सात अप्रैल के बीच युद्धविराम की संभावना बन सकती है। हालांकि होर्मुज पर नियंत्रण वाली शर्त ऐसी है, जिस पर अमरीका शायद ही राजी हो। युद्ध के पांचवें हफ्ते में अमरीका ने ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी तेज कर दी है। अमरीकी सेना खर्ग द्वीप और होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित तटीय इलाकों पर छापेमारी और कब्जे का प्लान बना रही है। खर्ग द्वीप ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र है, जहां से देश के 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात होता है। पेंटागन का मकसद शिपिंग पर हमला करने वाले हथियारों को नष्ट करना, ईरानी शासन को शर्मसार करना और भविष्य की बातचीत में मजबूत स्थिति बनाना है। हालांकि, अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी इस प्लान पर फैसला नहीं लिया है। उन्होंने खर्ग द्वीप को ईरान का क्राउन ज्वेल बताया और ईरान को होर्मुज स्ट्रेट खोलने की चेतावनी दी। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान समझौते को मानने से इनकार करेगा, तो अमरीका और कठोर हमले करेगा।

हाल ही में अमरीका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाई है। जापान से यूएस ट्रिपोली युद्धपोत पहुंचा है, जिसमें 3500 मरीन और नाविक शामिल हैं। यह पिछले 20 वर्षों में मध्य पूर्व में अमरीका की सबसे बड़ी तैनाती है। इस बीच, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालिबफ ने रविवार को चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान की सेनाएं जमीन पर अमरीकी सैनिकों के आने का इंतजार कर रही हैं, ताकि उन्हें जलाकर राख कर सकें और उनके क्षेत्रीय सहयोगियों को हमेशा के लिए सजा दे सकें। अगर अमरीकी सेना ईरानी जमीन पर उतरी, तो इस क्षेत्र में मौजूद अमरीकी सैनिकों और उनके सहयोगियों के खिलाफ कड़ा जवाबी हमला किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी गोलाबारी जारी है। हमारी मिसाइलें अपनी जगह पर तैनात हैं। हमारा संकल्प और विश्वास और बढ़ गया है। उधर, सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले ने अमरीकी वायुसेना को 6600 करोड़ रुपए का बड़ा झटका देते हुए उसके एक ई-3 सेंट्री एवेक्स जैसे अत्याधुनिक सर्विलांस विमान को नष्ट कर दिया है। इससे मिडिल ईस्ट में अमरीकी हवाई निगरानी क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसी बीच, ईरान युद्ध और महंगाई को लेकर अमरीका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पद से हटाने की मांग के साथ आयोजित ‘नो किंग्स रैली’ में 80 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। पूरे अमरीका के सभी 50 राज्यों में 3,300 से ज्यादा जगहों पर ये प्रदर्शन आयोजित किए गए

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