हिमाचल में युद्ध जैसी स्थिति से निपटने की तैयारी, शिमला में मॉक ड्रिल के जरिए परखी गई व्यवस्थाएं – भारत केसरी टीवी

हिमाचल में युद्ध जैसी स्थिति से निपटने की तैयारी, शिमला में मॉक ड्रिल के जरिए परखी गई व्यवस्थाएं

शिमला। मदन शर्मा

जम्मू-कश्मीर में बढ़ते सुरक्षा अलर्ट के बीच हिमाचल प्रदेश ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी तेज कर दी है। बुधवार को राजधानी शिमला में युद्ध जैसी स्थिति का मॉक ड्रिल कर तैयारियों का जायजा लिया गया। इस दौरान हवाई हमले का सजीव दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और सात घायल दिखाए गए। घायलों को IGMC अस्पताल में भेजा गया।

सुरक्षा चाक-चौबंद, कांगड़ा के बॉर्डर सील जम्मू-कश्मीर से सटे क्षेत्रों में हाई अलर्ट के चलते जिला कांगड़ा के प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कंडवाल में ITBP और हिमाचल पुलिस के जवान तैनात हैं। राज्य में प्रवेश कर रहे वाहनों की सघन तलाशी ली जा रही है। शक्तिपीठों – ज्वालामुखी, कांगड़ा, चामुंडा, श्रीनयनादेवी और चिंतपूर्णी – में भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

मॉक ड्रिल: उपायुक्त कार्यालय व संजौली पार्किंग बना अभ्यास स्थल शाम 4 बजे शिमला के उपायुक्त कार्यालय परिसर में सायरन बजने के साथ मॉक ड्रिल शुरू हुई। काल्पनिक हवाई हमले और आग लगने की सूचना पर आपदा प्रबंधन, पुलिस, सेना, होमगार्ड और अग्निशमन विभाग की टीमें तुरंत हरकत में आ गईं। महज दो मिनट में फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंच गई, जबकि पांच मिनट में अन्य टीमें भी स्थल पर सक्रिय हो गईं। सेना ने पहले भवन की रेकी की और फिर रेस्क्यू टीम ने घायलों को बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार दिया।

संजौली पार्किंग में भी अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (प्रोटोकॉल) ज्योति राणा की अगुवाई में मॉक ड्रिल की गई। यहां भी हवाई हमले की काल्पनिक स्थिति पर त्वरित प्रतिक्रिया दी गई और रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।

ब्लैकआउट और बस संचालन पर अस्थायी रोक रात 7:20 से 7:30 बजे तक पूरे शिमला शहर में ब्लैकआउट किया गया। माल रोड, रिज मैदान समेत शहर के सभी क्षेत्रों की लाइटें बंद कर दी गईं। इस दौरान सड़क पर मौजूद लोगों और चालकों ने भी सहयोग करते हुए वाहनों की लाइटें बंद कर दीं। एहतियातन HRTC बसों का संचालन भी 10 मिनट के लिए रोका गया।

सिविल डिफेंस को और मजबूत किया जाएगा ड्रिल के बाद उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य सिविल डिफेंस की तैयारियों की जांच और उसे और बेहतर बनाना है। उन्होंने बताया कि सेना, होमगार्ड और SDRF की टीमों ने बेहतरीन समन्वय के साथ कार्य किया। भविष्य में सिविल डिफेंस के लिए विशेष प्रशिक्षण, आपदा राहत किट और कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे। पुलिस अधीक्षक संजीव गांधी ने कहा कि सायरन सिस्टम को चिन्हित स्थानों पर लगाया जाएगा ताकि आपात स्थिति में समय पर चेतावनी दी जा सके।

निष्कर्ष: मॉक ड्रिल के जरिए यह साबित किया गया कि हिमाचल प्रदेश किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। नागरिकों से भी आपातकालीन हालात में सतर्क और सहयोगी रहने की अपील की गई है।

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