हिमाचल में डॉक्टरों की कमी होगी दूर: 400 MBBS भर्ती प्रक्रिया जारी, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का CM का ऐलान – भारत केसरी टीवी

हिमाचल में डॉक्टरों की कमी होगी दूर: 400 MBBS भर्ती प्रक्रिया जारी, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का CM का ऐलान

[MADAN SHARMA]

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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं रहेगी डाक्टरों की कमी, सीएम का ऐलान, 400 पदों पर भर्ती कर रही सरकार

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हिमाचल के प्राथमिक स्वास्थ्य संस्थानों में अगले छह माह में डाक्टरों की कमी नहीं रहेगी। सरकार एमबीबीएस के 400 एमबीबीएस डाक्टरों की भर्ती कर रही है। जिसमें 162 को नियुक्तियां दे दी है, जबकि 236 का रिटन एग्जाम हो चुका है और अब यह पर्सनल में जा रहे है। वहीं चंबा मेडिकल कॉलेज में सरकार पीजी कक्षाएं शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्रकाल में सुंदरनगर के विधायक राकेश जम्वाल और शाहपुर के विधाय केवल सिंह पठानिया की ओर से उठाए गए सवाल में सप्लीमेंट करते हुए यह जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के मेडिकल कालेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर और प्रोफेसर के 100 से ज्यादा पद भरने जा रही है। राज्य चयन आयोग के माध्यम से इन पदों को भरा जाएगा, ताकि सभी डाक्टर रिटन टेस्ट से और गुणवता वाले आएं। सीएम ने कहा कि वॉक-इन-इंटरव्यू की जगह लिखित परीक्षा से ही ये पद भरे जाएंगे। सिफारिश की गुंजाइश खत्म करने के लिए वॉक-इन-इंटरव्यू खत्म किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने रिटन एग्जाम की व्यवस्था को भी बदला है। पहले 30-35 वालों को भी पास मान लिया जाता था, लेकिन अब 40-45 वालों को पास किया।

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उन्होंने कहा कि कई जगहों पर डाक्टर असिस्टेंट लगा दिए, उनको भी अपग्रेड कर रहे है, इसके लिए रूल रिलेक्स कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मेडिकल कॉलेजों में हाई टेक्रोलॉजी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अगले एक वर्ष में हैल्थ टूरिज्म की ओर भी बढ़ेंगे, सभी मेडिकल कॉलेजों में फैक्ल्टी स्ट्रेंथ करेंगे, जिसके लिए नई नियुक्तियां करेंगे। उन्होंने कहा कि टांडा और आईजीएमसी को छोड़ किसी अन्य कालेजों के हालात ठीक नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज नाम के रह गए हैं और फैकल्टी के हालात भी ठीक नहीं हैं। मेडिकल कॉलेजों में कई जगह इंटरेक्शन की और पाया फैकल्टी नहीं है। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेज में सुधार हुआ है, जबकि अगले एक वर्ष में चार मेडिकल कॉलेजों में भी सुधार नजर आएगा। नाहन मेडिकल कॉलेज में भी पीजी कक्षाएं शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में महज डाक्टर ही नहीं चाहिए, फैकल्टी, मशीनें और स्टॉफ भी चाहिए।

एम्स दिल्ली से भी एक करोड़ सस्ती मशीन

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश के लिए वहीं मशीनें खरीदी जाएगी, जो एम्स ने खरीदी है। उन्होंने कहा कि एम्स दिल्ली ने जो मशीन ली, उससे हमने एक करोड़ सस्ती मशीन खरीदी है। मुख्यमंत्री ने सदन में रोबेटिक सर्जरी मशीनें से जुड़ी कंपनियों के नाम भी सदन में साझा किए। दरअसल प्रश्रकाल के दौरान भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने सप्लीमेंट करते हुए प्रदेश के मेडिकल कालेज में रोबेटिक सर्जरी मशीन लगाने वाली कंपनी और इसकी टेंडर प्रक्रिया से जुड़ा प्रश्र उठाया। जिस पर मुख्यमंत्री ने यह जवाब दिया।

किसानों से धोखाधड़ी के 12 मामले दर्ज

प्रदेश में वर्ष 2025 में 12 किसानों ने 12 मामले ठगी के दर्ज करवाए है। इनमें 10 मामलों में से एक मामले में आंशिक धनराशि वसूल की गई है। इन 10 मामलों में से एक मामला न्यायालय में विचाराधीन है, जबकि दो मामलों में निरस्त रिपोर्ट तैयार की गई है। इसी तरह सात मामलों की जांच चल रही है। लाहौल स्पीति की विधायक अनुराधा राणा की ओर से प्रश्रकाल में किसानों से ठगी को लेकर रखे प्रश्र के जवाब में मुख्यमंत्री सुक्खू ने लिखित में यह जानकारी दी है। इस दौरान सदन में विधायक ने किसान और कंपनी या फिर किसी फर्म के साथ होने वाले एग्रीमेंट में थ्रर्ड पार्टी के रूप में सरकारी अधिकारी या कर्मचारी को शामिल करने की बात कही।

निजी जमीन से बांस काटने पर फीस नहीं

हिमाचल में निजी भूमि से बांस काटने के लिए फीस नहीं लगेगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधायक बिक्रम सिंह ठाकुर की ओर से बजट सत्र के दूसरे दिन गुरुवार को प्रश्नकाल पर उठाए सवाल पर जवाब देते हुए यह ऐलान किया है। सीएम ने कहा कि यह सही है कि बांस को पेड़ की श्रेणी में नहीं रखा है। उन्होंने कहा कि निजी जमीन में भी बांस उगता है और प्रदेश से बाहर जाता है, तो परमिट फीस की व्यवस्था रखी है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र से कोई फीस नहीं ली जाएगी। लिखित जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने भारतीय वन अधिनियम 1927 में संशोधन कर गैर वन भूमि में उगाए गए बांस को वृक्ष की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है।

धारा 118 के तहत तीन वर्षों में 2353 आवेदन

हिमाचल प्रदेश में धारा 118 के तहत मंजूरी के लिए सरकार को तीन वर्षो में 2353 आवेदन मिले है। इनमें से 12 मामलों को सरकार ने अस्वीकृत कर दिया है, जबकि 874 मामले सरकार के पास लंबित पड़े हुए है। 01/01/23 से 31/01/2026 तक का यह आंकड़ा है। विधायक विक्रम सिंह के सवाल पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने लिखित जवाब दिया है। इसके मुताबिक धारा 118 के तहत पिछले तीन वर्षो में जिला सिरमौर से जुड़े 293, शिमला 341, सोलन 1250, ऊना 58, बिलासपुर 17, हमीरपुर 28, मंडी 65, चंबा 32, कांगड़ा 223, कुल्लू 46 और जिला किन्नौर से एक मामले का आवेदन, जबकि लाहुल स्पीति का इसमें कोई मामला नहीं है

 

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