हिमाचल के तीन सितारे बने सेना के अफसर, मेहनत और जुनून से हासिल की कामयाबी – भारत केसरी टीवी

हिमाचल के तीन सितारे बने सेना के अफसर, मेहनत और जुनून से हासिल की कामयाबी

[MADAN SHARMA]

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*हिमाचली युवाओं के सपनों को लगे पंख, रंग लाई मेहनत, भारतीय सेना में बने अफसर*

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धर्मशाला के राहुल पटियाल का बचपन का सपना पूरा

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धर्मशाला के उपरली बड़ोल निवासी राहुल पटियाल भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में नियुक्त हुए हैं। उन्होंने गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में अपना प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। परिजनों ने बताया कि राहुल का बचपन से ही सपना भारतीय सेना में अधिकारी बनने का था, जिसे उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से साकार किया। उन्होंने अपनी तकनीकी शिक्षा पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी के अंतर्गत गुरु नानक देव इंजीनियरिंग कालेज, लुधियाना से प्राप्त की। उनकी माता तृप्ता पटियाल ने बताया कि राहुल को बचपन से ही सेना में जाने का शौक था। उन्होंने यह भी बताया कि राहुल के दादा स्वर्गीय बिधि चंद भारतीय सेना की सिग्नल कोर में सूबेदार के पद पर कार्यरत रहे थे।

लेफ्टिनेंट आभा के पापा आज बहुत खुश होंगे
दिव्य हिमाचल ब्यूरो— पालमपुर
हिमाचल के पालमपुर की बेटी आभा का नाम शनिवार को इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। ऑफिसर्ज ट्रेनिंग एकेडमी गया में कठिन ट्रेनिंग पूरी कर आभा ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किया। आभा का यह यहां तक का सफर आसान नहीं था। पालमपुर की लाड़ली आभा ने खिलौनों से खेलने की उम्र में अपने पिता को खो दिया। अप्रैल, 2003 में जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में जीत सिंह, जो अपने पिता कफ्फू राम के पदचिह्नों पर चलते हुए महार रेजिमेंट में भर्ती हुए और मातृभूमि की रक्षा में आतंकवादियों से लोहा ले रहे थे, के दौरान शहीद हो गए। उन्हें मरणोपरांत ‘सेना मेडल’ से अलंकृत किया गया। उस वक्त उनकी बेटी आभा महज अढ़ाई साल की थी। जैसे-जैसे आभा बड़ी हुई, उसने पिता की शहादत की गाथाएं सुनीं। जब उसे अहसास हुआ कि उसके पिता ने भारत माता की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है, तो उसके बालमन ने एक जिद पकड़ ली, मैं भी सेना में जाऊंगी। आभा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा क्रेसेंट पब्लिक स्कूल बनूरी (पालमपुर) से पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने एनआईटी हमीरपुर को चुना। कॉलेज के दौरान एनसीसी यूनिट हमीरपुर में सीनियर अंडर ऑफिसर के रूप में उन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। उनकी काबिलीयत देख ओरैकल कंपनी ने उन्हें शानदार कैंपस प्लेसमेंट दिया। आभा ने एक महीना बंगलुरू में नौकरी भी की, लेकिन सेना में जाने की जिद्द बरकऱार रही। ऐशो आराम वाली कॉरपोरेट नौकरी को ठुकराकर उन्होंने पिता की विरासत को चुना और आज भारतीय सेना के लिए चयनित होकर हिमाचल का गौरव बढ़ाया है।

पिता के नक्श-ए-कदम पर नादौन के शिवांशु
कासं-हमीरपुर
हमीरपुर जिला के नादौन क्षेत्र के बढ़ेतर जिहान निवासी शिवांशु भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। शिवांशु का चयन वर्ष 2025 में ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी चेन्नई के लिए हुआ था। कठोर सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूर्ण करने के बाद वह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्त हुए हैं। उनके पिता विपन ठाकुर भारतीय सेना से सूबेदार मेजर के पद से सेवानिवृत्त हैं। अपने दृढ़ संकल्प, कठोर परिश्रम और देशसेवा के जज्बे के बल पर आज लेफ्टिनेंट बने हैं। शिवांशु के घर पर खुशी का माहौल है। उनकी माता सविता एक गृहिणी हैं।

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