सोलन में मजदूर-किसान एकता का प्रदर्शन: श्रम संहिताओं की प्रतियां जलाईं, MSP व संवैधानिक अधिकारों की मांग तेज – भारत केसरी टीवी

सोलन में मजदूर-किसान एकता का प्रदर्शन: श्रम संहिताओं की प्रतियां जलाईं, MSP व संवैधानिक अधिकारों की मांग तेज

[MADAN SHARMA]

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आज अखिल भारतीय आह्वान पर भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (CITU) और हिमाचल किसान सभा के संयुक्त नेतृत्व में जिला मुख्यालय सोलन में जिला उपायुक्त कार्यालय के बाहर एक विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। मजदूर-किसान एकता के इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मजदूरों, किसानों, महिलाओं और युवाओं ने भाग लिया। प्रदर्शन के उपरांत चारों श्रम संहिताओं की प्रतियां भी जलाई गईं तथा राष्ट्रपति महोदया को संबोधित संयुक्त ज्ञापन जिला उपायुक्त के माध्यम से भेजा गया।
CITU की ओर से जिलाध्यक्ष राकेश कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मजदूर-विरोधी चार श्रम संहिताओं को लागू कर दिया गया है, जिनका उद्देश्य देश के मजदूरों को बंधुआ मजदूरी और गुलामी की तरफ धकेलना है।
उन्होंने कहा कि—
– इन संहिताओं के माध्यम से फिक्स्ड टर्म रोजगार और ठेका प्रथा को पूरी तरह वैधता दी गई है।
– मालिकों द्वारा श्रम कानूनों के उल्लंघन को गैर-आपराधिक बना दिया गया है, जबकि मजदूरों की सामूहिक गतिविधियों को आपराधिक श्रेणी में डाल दिया गया है।
– यूनियन बनाने पर नई शर्तें लगाकर यूनियन का पंजीकरण रद्द करना आसान कर दिया गया है, जिससे मजदूरों की संगठन क्षमता खत्म की जा रही है।
– पूरे देश में न्यूनतम वेतन से भी नीचे फ्लोर वेतन का खतरनाक सिद्धांत लागू किया जा रहा है।
राकेश कुमार ने कहा कि लगभग एक शताब्दी में मजदूर आंदोलन के माध्यम से अर्जित किए गए अधिकारों को एक ही झटके में छीन लिया गया है। यह फैसला कॉर्पोरेट मालिकों को मजदूरों के शोषण की खुली छूट देता है। यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी त्रिपक्षीय बातचीत या भारतीय श्रम सम्मेलन की बैठक के संपन्न की गई है — जिसे देश के 11 में से 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने सर्वसम्मति से “मजदूर वर्ग पर जनसंहारक (genocidal) हमला” करार दिया है। केवल बीएमएस, जो भाजपा की पिछलग्गू यूनियन है, ने इसका समर्थन किया है।
हिमाचल किसान सभा की ओर से जिला समिति सदस्य नीतिश ठाकुर ने कहा कि किसानों का गुस्सा बिल्कुल जायज़ है क्योंकि 26 नवंबर 2020 को दिल्ली की सीमाओं पर हुए ऐतिहासिक किसान आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने लिखित समझौते में कई वादे किए थे — जिनमें स्वामीनाथन आयोग की सी2+50% फार्मूला आधारित MSP सुनिश्चित करना शामिल था, परंतु 5 वर्ष बीत जाने के बाद भी सरकार ने एक भी वादा पूरा नहीं किया।
उन्होंने कहा कि—
– यह किसानों के साथ सीधा विश्वासघात है।
– केंद्र सरकार कृषि संकट, ग्रामीण बेरोजगारी, लागत बढ़ोतरी और मंडियों के विनाश जैसे मुद्दों की अनदेखी कर रही है।
– सरकार द्वारा मनमाने तरीके से नए-नए किसान-विरोधी, मजदूर-विरोधी और जन-विरोधी कानून थोपे जा रहे हैं।
नीतिश ठाकुर ने चेतावनी दी कि यदि मजदूर-किसान और आम जनता की मांगों को तुरंत संबोधित नहीं किया गया, MSP को कानूनी गारंटी नहीं दी गई, श्रम संहिताओं को रद्द नहीं किया गया और निजीकरण की नीति बंद नहीं हुई — तो आने वाले समय में यह संयुक्त आंदोलन देशभर में और भी बड़े पैमाने पर फूटेगा और केंद्र सरकार की जन-विरोधी नीतियों की जड़ें हिला देगा।
आज के कार्यक्रम की प्रमुख मांगें थीं:
1. सभी फसलों का सी2+50% फार्मूला पर कानूनी MSP,
2. 4 श्रम संहिताओं की वापसी,
3. 26,000 रुपये राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन,
4. 10,000 रुपये मासिक सार्वभौमिक पेंशन,
5. किसानों-मजदूरों का कर्जमाफी,
6. सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण बंद,
7. मनरेगा को 200 दिन और ₹700 दैनिक मजदूरी के साथ मजबूत करना,
8. CETA जैसे व्यापार समझौतों को रद्द करना,
9. महंगाई पर रोक और समाज में बढ़ती साम्प्रदायिकता-दमन पर तत्काल नियंत्रण।
कार्यक्रम के समापन पर नेताओं ने सरकार को चेताया कि यह लड़ाई मजदूरों-किसानों का अस्तित्व और देश की आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा बचाने की लड़ाई है, जो निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रही है।#SolanProtest

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