“शिमला में स्वास्थ्य का डबल अभियान: सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ 29 मार्च से विशेष मुफ्त HPV टीकाकरण, 23 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर 2.21 लाख बच्चों को एल्बेंडाजोल-विटामिन ए” — उपायुक्त अनुपम कश्यप – भारत केसरी टीवी

“शिमला में स्वास्थ्य का डबल अभियान: सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ 29 मार्च से विशेष मुफ्त HPV टीकाकरण, 23 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर 2.21 लाख बच्चों को एल्बेंडाजोल-विटामिन ए” — उपायुक्त अनुपम कश्यप

[ MADAN SHARMA]

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पहली बार सर्वाइकल कैंसर के विरुद्ध चलेगा विशेष टीकाकरण अभियान
 
टीकाकरण के लिए 1 मार्च से आशा वर्कर करेंगी घर-घर सर्वे
 
सर्वाइकल कैंसर, जोकि स्तन कैंसर के बाद सबसे ज्यादा महिलाओं में पाई जाने वाली कैंसर की बीमारी है, के विरुद्ध पहली बार सरकार द्वारा एक विशेष टीकाकरण अभियान की शुरुआत की जा रही है जिसको लेकर 1 मार्च 2026 से आशा वर्कर के माध्यम से घर-घर जाकर सर्वे करवाया जाएगा और पात्र बालिकाओं की पहचान की जाएगी।
इस टीकाकरण अभियान को लेकर आज यहाँ उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में बताया गया कि इस राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान की शुरुआत 29 मार्च 2026 से की जानी प्रस्तावित है, जिसके तहत प्रत्येक रविवार को टीकाकरण होगा। यह अभियान 3 माह तक चलेगा।
क्या है सर्वाइकल कैंसर
सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा (बच्चेदानी के निचले हिस्से) में होने वाला कैंसर है, जो मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के कारण होता है। यह 30-50 वर्ष की महिलाओं में अधिक आम है और यौन संबंध से फैलता है। सर्वाइकल कैंसर विश्व स्तर पर महिलाओं में चौथा सबसे आम कैंसर है और भारत में यह दूसरा सबसे आम कैंसर है। एचपीवी टीकाकरण और नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर को काफी हद तक रोका जा सकता है। भारत में हर वर्ष लगभग 1.2–1.3 लाख नए सर्वाइकल कैंसर के मामले सामने

आते हैं। हर वर्ष लगभग 75,000–80,000 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर पाया जाता है। यह रोग परिवार और समाज के लिए गंभीर क्षति है। एच.पी.वी. संक्रमण सामान्यतः  युवावस्था में होता है, इसलिए कम उम्र में टीकाकरण करने से वायरस के संपर्क से पहले सर्वोत्तम सुरक्षा मिलती है। एच.पी.वी. वैक्सीन उन प्रकार के वायरस से सुरक्षा प्रदान करती है, जो अधिकांश सर्वाइकल कैंसर का कारण बनते हैं।

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इन आयु वर्ग के लिए है टीकाकरण
स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार, जिन बालिकाओं ने 14 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है लेकिन 15 वर्ष पूर्ण नहीं किए हैं, वह टीकाकरण के लिए पात्र हैं। इस अभियान के तहत सभी पात्र बालिकाओं को कवर किया जाएगा जिसमें प्रवासी और बेसहारा बालिकाएं भी शामिल रहेंगी। यह एकल खुराक मजबूत और दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करती है। यह टीका सुरक्षित और प्रभावी है तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरणों द्वारा अनुमोदित है। विश्वभर में अब तक करोड़ों खुराक दी जा चुकी हैं। महिलाओं को 35 वर्ष की आयु में और 45 वर्ष की आयु में इसकी जांच करवानी चाहिए। अगर समय पर करवाई गई जांच में कैंसर पाया जाता है तो उसका इलाज संभव है। टीकाकरण से लगभग 83 प्रतिशत तक सर्वाइकल कैंसर के मामलों को रोका जा सकता है।
अभियान के तहत निशुल्क होगा टीकाकरण, जिला में 39 स्थल चिन्हित 
भारत में निजी क्षेत्र में इस टीके की एक खुराक की कीमत 10,000 रुपए तक हो सकती है, लेकिन इस अभियान के अंतर्गत यह पूर्णतया निशुल्क उपलब्ध है। यह टीकाकरण आपके घर के निकट स्थित टीकाकरण स्थलों (सरकारी अस्पतालों) में किया जाएगा जिसके लिए शिमला शहर में 5 स्थल और पूरे जिला में 39 स्थल चिन्हित किए गए हैं। एच.पी.वी. टीकाकरण चयिनत रविवार को आयोजित किया जाएगा। सभी अभिभावकों से अनुरोध है कि वे अपनी सहमति प्रदान करें और अपनी पात्र बालिकाओं के स्वस्थ और समृद्ध जीवन हेतु टीकाकरण अवश्य करवाएँ।
बैठक में बताया गया कि यूएस की वैक्सीन गार्डासिल की 0.5 एमएल की एक डोज़ बायां बाजू के ऊपर के हिस्से में लगाई जाएगी।
यू-विन पोर्टल पर होगा टीकाकरण के लिए पंजीकरण, अभिभावकों की सहमति आवश्यक 
बैठक में बताया गया कि टीकाकरण के लिए यू-विन पोर्टल पर पात्र बालिकाओं का पंजीकरण आशा वर्कर द्वारा किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, टीकाकरण के लिए अभिभावकों की सहमति आवश्यक है जिसके लिए ओटीपी के माध्यम से उनकी सहमति ऑनलाइन दर्ज की जाएगी।
टीकाकरण के बाद हल्का बुखार या इंजेक्शन स्थल पर मामूली सा दर्द जैसे सामान्य व अस्थायी लक्षण हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, टीकाकरण के लिए खाली पेट न आएं और टीकाकरण के उपरांत 30 मिनट तक निगरानी में रहना आवश्यक है।
टीकाकरण से वंचित न रहे कोई भी पात्र बालिका – उपायुक्त 
उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि टीकाकरण वाले सभी 39 केंद्रों पर पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं ताकि किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटा जा सके। इसके अतिरिक्त उन्होंने श्रम विभाग को भी इस अभियान में जोड़ने के निर्देश दिए ताकि प्रवासी मजदूरों के परिवारों तक पहुंचा जा सके और कोई भी पात्र बालिका टीकाकरण से वंचित न रहे। उन्होंने शिक्षा विभाग को सभी स्कूलों में टीकाकरण को लेकर पूर्ण जानकारी साझा करने के निर्देश दिए ताकि सभी बालिकाओं को टीकाकरण उपलब्ध हो सके।
बैठक में प्रधानाचार्य आईजीएमसी डॉ सीता ठाकुर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ यशपाल रांटा, उपनिदेशक उच्च शिक्षा लेखराज भारद्वाज, जिला कार्यक्रम अधिकारी आईसीडीएस ममता पॉल, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ विनीत, कमला नेहरू अस्पताल से एसएमओ डॉ मीनाक्षी और डॉ निशि सूद, आईजीएमसी से उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ प्रवीण और डॉ सुरेंद्र सिंह, आयुष विभाग से डॉ अख्तर अब्बास, आस्था अस्पताल पंथाघाटी से कल्पना शर्मा, आरसीएस शिमला की अध्यक्ष पूजा गोयल और सुरभि सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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23 फरवरी को सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को दी जाएगी एल्बेंडाजोल 

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उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आज यहाँ राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के दूसरे राउंड के लिए गठित जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति की बैठक का आयोजन किया गया।
उपायुक्त ने कहा कि जिला शिमला में 23 फरवरी, 2026 को सभी सरकारी और गैरसरकारी स्कूलों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों पर 1 से 19 साल तक के बच्चों को एल्बेंडाजोल और विटामिन-ए दी जाएगी ताकि जिला के सभी बच्चों को कृमि मुक्त किया जा सके।
उन्होंने बताया कि 1 से 5 साल तक के बच्चों को एल्बेंडाजोल और विटामिन-ए की गोलियां आंगनवाड़ी केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्ले स्कूल में प्रदान की जाएँगी। वही 5 से 19 साल तक के बच्चों को एल्बेंडाजोल स्कूलों में प्रदान की जाएगी ताकि बच्चों के पोषण एवं एनीमिया में सुधार किया जा सके।

उपायुक्त ने कहा कि इस एक दिवसीय कार्यक्रम के तहत जिला के 2150 सरकारी एवं 450 निजी स्कूलों, 2154 आंगनवाड़ी केंद्रों, 997 आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से कार्यक्रम को सफल बनाया जाएगा।

कार्यक्रम में जिला शिमला के 1 से 19  साल तक के 2 लाख 21 हजार 319 बच्चों का लक्ष्य समूह निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि जिला शिमला में कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए प्रशिक्षण का आयोजन किया जा चूका है। इसके साथ-साथ सभी स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों एवं लोगों को जागरूक करने के दृष्टिगत प्रचार-प्रसार सामग्री का भी वितरण किया जा चूका है।
उन्होंने कहा कि 1-2 वर्ष की आयु के बच्चों को पहले 2 मिलीलीटर विटामिन-ए सिरप दिया जाएगा, तत्पश्चात 5 मिनट के अंतराल के बाद आधी गोली एल्बेंडाजोल चुरा बनाकर दी जाएगी। इसी प्रकार, 2-5 वर्ष के बच्चों को 2 मिलीलीटर विटामिन-ए और एक गोली एल्बेंडाजोल दी जाएगी।
5 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को एल्बेंडाजोल की एक पूरी गोली दी जाएगी। पहले से बीमार बच्चे को दवाई नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस सन्दर्भ में सभी आंगनवाड़ी केंद्रों एवं स्कूलों को आवशयक दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

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