आंबेडकर समानता लाना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने वोट बैंक का वायरस फैलाया : नंदा – भारत केसरी टीवी

आंबेडकर समानता लाना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने वोट बैंक का वायरस फैलाया : नंदा

शिमला, भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी कर्ण नंदा ने बैनमोर वार्ड में डॉ भीमराव अंबेडकर सम्मान अभियान के अंतर्गत संपर्क अभियान में भाग लिया। उनके साथ प्रदेश कोषाध्यक्ष कमल सूद, पूर्व पार्षद अनूप वैद्य, राजेश शर्मा उपस्थित रहे। इस दौरान वार्ड में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा 24 घरों में संपर्क किया है।

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मीडिया से बातचीत करते हुए कर्ण नंदा ने बताया कि पूरे प्रदेश भर में भीमराव अंबेडकर सम्मान संपर्क अभियान चल रहा है, जिसके अंतर्गत नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मंडी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने नाहन, प्रदेश संगठन महामंत्री सिद्धार्थन ने शिमला ग्रामीण, डॉ राजीव भारद्वाज नूरपुर, सुरेश कश्यप ने पच्छाद, विपिन परमार सुलह, त्रिलोक जमवाल बिलासपुर, रणधीर शर्मा नैना देवी, सतपाल सत्ती ऊना, राकेश जमवाल ने सुंदरनगर एवं प्रदेश महामंत्री बिहारी लाल शर्मा ने रोहड़ू में इस कार्यक्रम में भाग लिया। पूरे प्रदेश में भाजपा के 2000 से अधिक कार्यकर्ताओं ने 10000 से अधिक घरों में संपर्क किया। नंदा ने कहा कांग्रेस ने डा. भीमराव आंबेडकर का हमेशा अपमान किया। आंबेडकर संविधान के संरक्षक रहे, जबकि कांग्रेस संविधान की भक्षक बन गई। आंबेडकर समानता लाना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने वोट बैंक का वायरस फैलाया।

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नंदा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी, जो अब पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय मनमोहन सिंह के निधन के बाद उनके लिए स्मारक बनाने की मांग कर रही है, उसे यह आत्ममंथन करना चाहिए कि भारत के सबसे प्रगतिशील प्रधानमंत्रियों में से एक, स्वर्गीय पी.वी. नरसिम्हा राव के साथ उनके निधन के बाद कैसा व्यवहार किया गया था। उनके पार्थिव शरीर को कांग्रेस मुख्यालय में प्रोटोकॉल के तहत निर्धारित आधिकारिक स्थान देने से इनकार कर दिया गया था। वरिष्ठ कांग्रेस नेता मारिट अल्वा ने भी इस अनुचित व्यवहार पर आपत्ति जताई थी। स्वर्गीय पी.वी. नरसिम्हा राव का किया गया अनादर कांग्रेस की अवसरवादी राजनीति का प्रतिबिंब है। उन्हें यह याद रखना चाहिए कि किसने बाबासाहेब अंबेडकर को दिल्ली में दाह संस्कार का सम्मान देने से इनकार किया था और किसने उनके निधन के बाद राजधानी में उनके स्मारक के निर्माण में अड़चनें पैदा की थीं।
यह भी याद रखने योग्य है कि जिन्होंने स्वयं को भारत रत्न से सम्मानित किया, वे बाबासाहेब के साथ अन्याय करने से नहीं चूके। कांग्रेस, जिसने सत्ता के लिए बार-बार संविधान के मूल भाव को तोड़ा है, उसे बाबासाहेब अंबेडकर की विरासत पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है।

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