#लव- जिहाद -कितना -खतरनाक , माधुरी गुप्ता: एक दर्दनाक हकीकत# – भारत केसरी टीवी

#लव- जिहाद -कितना -खतरनाक , माधुरी गुप्ता: एक दर्दनाक हकीकत#

माधुरी गुप्ता भारतीय विदेश सेवा की एक वरिष्ठ अधिकारी थीं, जिन्होंने कई देशों में उच्च पदों पर काम किया था। उर्दू भाषा पर उनकी गहरी पकड़ थी, जिसके चलते उन्हें पाकिस्तान में मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई।

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वहीं, एक पार्टी के दौरान उनकी मुलाकात 30 वर्षीय युवक जमशेद उर्फ जिमी से हुई। जमशेद की बातों और व्यवहार ने माधुरी का दिल जीत लिया। उम्र के इस पड़ाव पर उन्होंने न सिर्फ उसे अपना जीवनसाथी मान लिया, बल्कि इस्लाम भी कबूल कर लिया।

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लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा खतरनाक थी। भारतीय खुफिया एजेंसियों को माधुरी की संदिग्ध गतिविधियों पर संदेह हुआ, जिसके बाद उनकी ईमेल और फोन पर नज़र रखी जाने लगी। जांच में यह सामने आया कि वह महत्वपूर्ण गुप्त जानकारियां पाकिस्तान को भेज रही थीं।

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दरअसल, जमशेद कोई आम व्यक्ति नहीं था, बल्कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का प्रशिक्षित जासूस था। उसे खासतौर पर माधुरी गुप्ता को फंसाने के लिए तैयार किया गया था, क्योंकि एजेंसी को अंदाजा था कि इतनी वरिष्ठ अधिकारी, जो अविवाहित भी हैं, शायद किसी साथी की तलाश में होंगी।

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जैसे ही इस गुप्तचर गतिविधि की पुष्टि हुई, भारत सरकार ने माधुरी को एक बहाने से वापस बुलाया और दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पुख्ता सबूतों के सामने आने के बाद उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और उन्हें तीन साल की सजा सुनाई गई।

कोविड महामारी के दौरान उन्हें अस्थायी जमानत मिली, जिसके बाद वह गुमनामी में अजमेर चली गईं। वहीं, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते उनका निधन हो गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि उनके अंतिम संस्कार के लिए कोई परिजन या करीबी मौजूद नहीं था। मोहल्ले और नगर निगम के लोगों ने उनका अंतिम संस्कार किया।

यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा सबक है। जब इतनी पढ़ी-लिखी और उच्च पद पर आसीन महिला भावनात्मक जाल में फंस सकती हैं, तो कम उम्र की मासूम लड़कियों को इस खतरे से बचाना कितना जरूरी हो जाता है! जागरूकता और सतर्कता ही इस तरह की घटनाओं को रोकने का एकमात्र तरीका है।

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