मध्य एशिया तनाव का असर: पेट्रोल-डीजल महंगा, LPG संकट गहराया, महंगाई से आम आदमी पर डबल मार – भारत केसरी टीवी

मध्य एशिया तनाव का असर: पेट्रोल-डीजल महंगा, LPG संकट गहराया, महंगाई से आम आदमी पर डबल मार

[MADAN SHARMA]

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LPG सकंट के बीच जनता को लग गया एक और तगड़ा झटका, अभी और बिगड़ सकते हैं हालात
मध्य एशिया में बढ़ता तनाव अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और उनकी जेब पर साफ दिखाई देने लगा है।

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ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक तेल बाजार को हिला कर रख दिया है, और इसका सीधा असर भारत में देखने को मिल रहा है। देशभर में पेट्रोल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में 2 से 2 रु 30 पैसे प्रति लीटर तक बढ़ोतरी कर दी है, जबकि इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में भी बड़ा उछाल आया है—87.57 रुपये से बढ़कर 109.59 रुपये प्रति लीटर, यानी करीब 22 रुपये की बढ़ोतरी। इससे मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की लागत बढ़ना तय है, जिसका असर अंततः आम उपभोक्ता पर ही पड़ेगा। हालांकि अभी सामान्य पेट्रोल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल पार होने के बाद इसके भी महंगा होने के संकेत साफ हैं। बात भारत की ही करें तो भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में जरा सा उतार-चढ़ाव भी देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर बड़ा असर डालता है।

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि इस युद्ध का सबसे ज्यादा असर ही एनर्जी मार्केट में पड़ा है। युद्ध के बदलते समीकरणों के बीच एनर्जी मार्केट में खलबली मची हुई है। एक और जहां आज प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ा दिए, वहीं दूसरी ओर कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने MSME फार्मा सेक्टर को गहरे संकट में डाल दिया है। पैरासिटामोल जैसे आम इस्तेमाल की दवा के कच्चे घटक की कीमत 250 रुपये से बढ़कर करीब 450 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि एल्यूमीनियम फॉइल, पीवीसी, पीईटी बोतलें, कांच की शीशियां और अन्य पैकेजिंग सामग्री भी महंगी हो गई हैं। इससे उत्पादन लागत में भारी इजाफा हुआ है। देश के सबसे बड़े फार्मा हब बद्दी-बरोटीवाला में भी फार्मा सेक्टर पर संकट मंडरा रहा है। ऐसे में हिमाचल ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है ताकि उद्योग को राहत मिल सके और दवाइयों की कीमतें काबू में रखी जा सकें।

इसके अलावा अगर बात करें तो महंगाई का असर अब आम लोगों की थाली तक भी पहुंच गया है। आज ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में 19% तक बढ़ोतरी कर दी है, जिससे अब हर ऑर्डर पर उपभोक्ताओं को पहले से ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। वहीं गैस की किल्लत के संकेत पहले ही कई जगहों पर देखने को मिल रहे हैं और अगर यह वैश्विक तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो LPG सप्लाई पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। कुल मिलाकर हालात यह इशारा कर रहे हैं कि मध्य एशिया का यह संघर्ष अब हर सेक्टर को प्रभावित कर रहा है—चाहे वह ईंधन हो, उद्योग, दवाइयां या रोजमर्रा का खर्च। आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है, और अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दुनिया समय रहते इस संकट को काबू में कर पाएगी या आम आदमी को महंगाई का यह बोझ और ज्यादा झेलना पड़ेगा।

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