भेड़पालकों के लिए नई चरागाह नीति बनाएगी सुक्खू सरकार – भारत केसरी टीवी

भेड़पालकों के लिए नई चरागाह नीति बनाएगी सुक्खू सरकार

[MADAN SHARMA]

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भेड़पालकों को चरागाह देेगी सुक्खू सरकार, वन विभाग बनाएगा पॉलिसी, पशुपालकों का जुटाया जा रहा है आंकड़ा

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हिमाचल की सुक्खू सरकार प्रदेश के भेड़पालकों को एक बड़ी सौगात देने की तैयारी में है। वन विभाग पशुपालकों के लिए चरागाहों को खोलने के लिए नीति बनाएगा। इसके लिए आरंभिक तौर पर फोरेस्ट डिपार्टमेंट पशुपालन विभाग की मदद से भेड़पालकों व पशुपालकों का डाटा जुटाने में जुटा हुआ है। इससे जुड़ा एक स्टीक आंकड़ा मिलने के उपरांत वन विभाग नीति बनाने को लेकर आगामी प्रक्रिया आरंभ करेगा। अहम है कि प्रदेश मंत्रिमंडल ने पूर्व में हुई बैठक में चरवाहों और उनके पशुधन की आवाजाही को सुचारू बनाने के लिए नया कानून लाने का फैसला लिया है। साथ ही समस्त वन भूमि और घास के मैदानों को पशुओं के लिए खोलने की दिशा में कदम बढ़ाने का भी कैबिनेट में निर्णय हो चुका है।

मंत्रिमंडल के फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए वन विभाग ने कार्रवाई आरंभ कर दी है। इसके लिए फोरेस्ट डिपार्टमेंट ने पशुपालन विभाग की मदद से भेड़पालकों व चरवाहों को लेकर डाटा जुटा रहा है। इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि मौजूदा समय में कितने भेड़पालक अथवा चरवाहे चारागाहों में अपने पशुधन की ग्रेजिंग करवा रहे हैं। डाटा जुटाने के बाद वन विभाग चारागाहों के संरक्षण और भेड़पालकों व चरवाहों की सुविधा को ध्यान में रखकर एक नीति तैयार करेगा। सरकार का भी मानना है कि राज्य में पारंपरिक पशुपालकों और घुमंतू चरवाहों की आजीविका चरागाहों पर निर्भर है। ऐसे में उनके लिए स्पष्ट और व्यवस्थित नीति होना जरूरी है।

पीसीसीएफ कहते हैं

प्रिंसीपल कंजरवेटर ऑफ फोरेस्ट डा. संजय सूद का कहना है कि डिपार्टमेंट पशुपालन विभाग की मदद से भेड़पालकों व चरवाहों का डाटा जुटा रहा है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि मौजूदा समय में कितनी संख्या में यह चरागाहों का उपयोग पशुधन के लिए कर रहे हैं। एक स्टीक आंकड़ा बनाने के उपरांत विभाग एक नीति तैयार करेगा।

कई जिलों के लोग पशुओं के साथ करते हैं प्रवास

प्रदेश के कई जिलों में गद्दी, गुज्जर और अन्य पशुपालक समुदाय हर साल अपने पशुओं के साथ प्रवास करते हैं और जंगलों के आसपास मौजूद प्राकृतिक चारागाहों का उपयोग करते हैं। खासकर प्रदेश के भेड़पालकों की वन भूमि पर मौजूद चरागाहों को लेकर अकसर शिकायतें रहती हंै और सरकार के समक्ष भी इस तरह के मामले सामने आते रहे है। उधर, वन विभाग प्रदेश के विभिन्न वन मंडलों में भेड़पालकों व चरवाहों और उनके पास मौजूद पशुधन की संख्या, पारंपरिक चराई मार्गों और उपयोग में आने वाले चारागाहों का पूरा विवरण जुटाया जा रहा है। पशुपालन विभाग भी सहयोग कर रहा है।

 

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