बंदरों का आतंक राष्ट्रीय समस्या, निपटने के लिए बने व्यापक कार्ययोजना: अनुराग सिंह ठाकुर  – भारत केसरी टीवी

बंदरों का आतंक राष्ट्रीय समस्या, निपटने के लिए बने व्यापक कार्ययोजना: अनुराग सिंह ठाकुर 

शिमला बयूरो सुभाष शर्मा   18/03/2026

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बंदरों का आतंक राष्ट्रीय समस्या, निपटने के लिए बने व्यापक कार्ययोजना: अनुराग सिंह ठाकुर

श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने लोकसभा में नियम 377 के तहत बंदर आतंक पर मामला उठाया, राष्ट्रीय कार्य योजना की मांग की

 

हिमाचल में सात वर्षों में 2,200 करोड़ रुपये के नुकसान का हवाला दिया, नागरिकों पर रोजाना हमलों का जिक्र

 

17 मार्च 2026, नई दिल्ली/ हिमाचल प्रदेश: पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने लोकसभा में नियम 377 के अंतर्गत

बंदर आतंक की गंभीर और लंबे समय से उपेक्षित समस्या को राष्ट्रीय संकट करार देते हुए तत्काल और समन्वित केंद्रीय हस्तक्षेप की मांग की।

 

 

श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने सदन का ध्यान देश भर में, विशेष रूप से कृषि प्रधान राज्यों में अनियंत्रित बंदर आबादी द्वारा हो रही भारी तबाही की ओर आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में अकेले किसानों को 70,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि योग्य भूमि पर खेती छोड़नी पड़ी है। राज्य में वार्षिक फसल नुकसान 500 करोड़ रुपये से अधिक है, और 2017 से 2024 के बीच बंदरों के हमलों से कृषि को होने वाला कुल नुकसान अनुमानित 2,200 करोड़ रुपये है। यह आंकड़ा इस संकट की गंभीरता को स्पष्ट रूप से उजागर करता है, जिसे बहुत लंबे समय से अनदेखा किया गया है।

 

 

आर्थिक तबाही के अलावा, श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने मानव जीवन और सुरक्षा पर बंदरों के प्रकोप के गंभीर खतरे को उजागर किया।

हिमाचल प्रदेश के जिला-स्तरीय आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में अकेले एक जिले में प्रतिदिन लगभग दस लोग बंदरों द्वारा काटे जा रहे हैं। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग इन हमलों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं, और बंदर-प्रभावित क्षेत्रों में लोग लगातार भय और तनाव में जी रहे हैं”

 

इस संकट के मूल कारणों पर बोलते हुए श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने समस्या की जड़ 1978 के बंदर निर्यात प्रतिबंध को बताया, जिसके कारण बंदरों की आबादी अनियंत्रित रूप से बढ़ी है और इसे कभी ठीक से प्रबंधित नहीं किया गया। इसके अलावा, व्यापक वनों की कटाई ने प्राकृतिक आवास नष्ट कर दिए हैं, शिकारी प्रजातियों की कमी ने प्राकृतिक नियंत्रण समाप्त कर दिया है, और राष्ट्रीय स्तर पर कोई समन्वित नीति न होने से राज्य अकेले ही इस चुनौती से जूझ रहे हैं।

 

श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा” आज बंदरों का आतंक एक राष्ट्रीय संकट बन चुका है। हमारे किसान अपनी खेतों को छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। हमारे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग हर रोज हमलों का सामना कर रहे हैं। राज्य अकेले इस लड़ाई नहीं लड़ सकते। केंद्र को तत्काल एक विश्वसनीय, मानवीय और वैज्ञानिक आधार वाली राष्ट्रीय कार्य योजना लेकर आगे आना चाहिए”

 

 

श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने भारत सरकार से बंदर-मानव संघर्ष पर एक व्यापक राष्ट्रीय कार्य योजना तैयार करने का आग्रह किया, जिसमें बंदर-प्रभावित राज्यों के साथ परामर्श किया जाए। उन्होंने बड़े पैमाने पर नसबंदी कार्यक्रमों और इम्यूनोकॉन्ट्रासेप्शन तकनीकों को आबादी नियंत्रण के मानवीय तरीकों के रूप में अपनाने, साथ ही आवास बहाली के प्रयासों की मांग की।

 

श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने मानकीकृत, समयबद्ध किसान मुआवजा ढांचे की मांग की, ताकि कृषि नुकसान झेलने वालों को तत्काल राहत मिल सके, साथ ही जमीनी स्तर पर समुदाय-आधारित फसल सुरक्षा सहायता प्रणालियों की स्थापना की। अपने निवेदन में श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने सरकार से इस उद्देश्य के लिए समर्पित बजटीय फंड आवंटित करने और राज्य सरकारों को वैज्ञानिक रूप से सत्यापित तथा मानवीय बंदर नियंत्रण उपायों को समयबद्ध तरीके से लागू करने के स्पष्ट निर्देश जारी करने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि यह महज एक राज्य-स्तरीय प्रशासनिक मामला नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय मुद्दा है जिसके लिए राष्ट्रीय स्तर का समाधान जरूरी है।

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