पेंशनरों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है राज्य सरकार: नरेश चौहान   – भारत केसरी टीवी

पेंशनरों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है राज्य सरकार: नरेश चौहान  

[MADAN SHARMA]

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आज यहां हिमाचल पेंशनर्स यूनाइटेड फ्रंट की तिमाही बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि पेंशनरों के अधिकारों के लिए संघर्ष को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि सामूहिक कल्याण के नजरिये से देखा जाना चाहिए।

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उन्होंने इस अवसर पर वरिष्ठ नागरिकों के साथ संवाद का अवसर मिलने पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन लोगों ने अपनी युवावस्था से लेकर सेवानिवृत्ति तक का सबसे महत्वपूर्ण समय राज्य और राष्ट्र की सेवा में समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने अधिकारों के लिए उनकी निरंतर आवाज उठाना उनकी दृढ़ता और जागरूकता को दर्शाता है।

नरेश चौहान ने कहा कि यह मंच रोहड़ू और जुब्बल-कोटखाई से लेकर मंडी तक प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले लाखों पेंशनरों की समस्याओं को उठाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने विभिन्न पेंशनर संगठनों से एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि उनकी ताकत उनकी एकता में ही निहित है। उन्होंने पूर्व सरकारी कर्मचारियों के योगदान को सराहते हुए आश्वासन दिया कि वर्तमान सरकार उनकी जायज मांगों को समझती है और लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।

राज्य की वित्तीय स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार को पिछली सरकार से भारी वित्तीय देनदारियों की चुनौती विरासत में मिली है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए छठे वेतन आयोग से संबंधित हजारों करोड़ रुपये के एरियर लंबित थे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से विशेष अनुदान और राजस्व घाटा अनुदान (RDG) मिलने के बावजूद पूर्व में कई घोषणाएं बिना पर्याप्त वित्तीय प्रावधानों के की गई थीं, जिसके कारण वर्तमान सरकार को कुछ कठिन निर्णय लेने पड़े और कई अधिसूचनाओं को निरस्त करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए राजस्व घाटा अनुदान बेहद महत्वपूर्ण है और सरकार इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष लगातार उठा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए शराब ठेकों की खुली नीलामी जैसे कदम उठाए गए, जिससे पहले वर्ष में ही 460 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई। इसके अलावा राज्य के जल संसाधनों पर अधिकार सुनिश्चित करने के लिए भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।

सरकार की कर्मचारी हितैषी नीति का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली कर्मचारियों के भविष्य के प्रति सम्मान का प्रतीक है और यह निर्णय राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि कर्मचारियों के हित में लिया गया है। उन्होंने बताया कि लंबित एरियर का भुगतान चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है, जिसमें पहले 75 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों को प्राथमिकता दी गई और अब 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों को प्राथमिकता दी जा रही है।

उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे-जैसे राज्य की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, पेंशनरों की सभी शेष मांगों को भी व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जाएगा।

अपने संबोधन के अंत में नरेश चौहान ने आश्वासन दिया कि पेंशनर्स यूनाइटेड फ्रंट के प्रतिनिधिमंडल और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करवाई जाएगी, ताकि उनकी समस्याओं को सीधे सरकार के सर्वोच्च स्तर पर रखा जा सके।

बैठक में हिमाचल पेंशनर यूनाइटेड फ्रंट के अध्यक्ष आत्मा राम शर्मा, मंडी समन्वयक हरीश शर्मा, महासचिव हुकुम सिंह ठाकुर, कॉर्पोरेट सेक्टर चेयरमैन बी.एस. चौहान सहित कई अन्य प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे।

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