“नीति से परिणीति 2.0” के तहत परिणाम आधारित बजटिंग पर क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित – भारत केसरी टीवी

“नीति से परिणीति 2.0” के तहत परिणाम आधारित बजटिंग पर क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित

[ MADAN SHARMA]

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शिमला,

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि “Outcome Budgeting के माध्यम से नीति को प्रदर्शन में परिवर्तित करने हेतु नोडल अधिकारियों की क्षमता सुदृढ़ीकरण” विषय पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन शिमला में किया गया। यह कार्यशाला “नीति से परिणीति 2.0” श्रृंखला का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य विभागीय योजना प्रणाली को मजबूत बनाकर नीतियों को मापनीय परिणामों में प्रभावी रूप से परिवर्तित करना है।

इस कार्यशाला का आयोजन राज्य परिवर्तन प्रकोष्ठ (State Transformation Cell – STC) द्वारा नीति आयोग के स्टेट सपोर्ट मिशन के अंतर्गत, तकनीकी सहयोगी GIZ India के सहयोग से किया गया।

कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर योजना विभाग के सलाहकार डॉ. बसु सूद ने कहा कि परिणाम आधारित बजटिंग केवल वित्तीय प्रारूप नहीं, बल्कि साक्ष्य-आधारित शासन, रणनीतिक योजना और सार्थक प्रभाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है। उन्होंने विभागीय प्राथमिकताओं को ऐसे परिणामों से जोड़ने पर बल दिया, जो नागरिकों के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार लाएं। कार्यशाला में विशेषज्ञ वक्ताओं द्वारा विभिन्न सत्र आयोजित किए गए।

प्रवक्ता ने बताया कि अधिकारियों को परिणाम आधारित बजटिंग के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम अभ्यासों, “थ्योरी ऑफ चेंज” तथा मापनीय प्रगति सुनिश्चित करने हेतु SMART संकेतकों के विकास की तकनीकों से अवगत कराया गया। “States के लिए NITI” विषय पर विशेष सत्र में नीति आयोग के स्टेट सपोर्ट मिशन की भूमिका, राज्य स्तरीय संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ करने, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देने तथा विभागीय परिणामों को राज्य की विकास प्राथमिकताओं से जोड़ने संबंधी जानकारी दी गई।

डेटा-आधारित योजना और बजट निर्माण पर केंद्रित चर्चाओं में डेटा गुणवत्ता, डेटा प्रवाह और निगरानी ढांचे के महत्व पर प्रकाश डाला गया। सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से जुड़ाव पर एक व्यावहारिक सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझाया गया कि विभागीय योजनाएं और परिणाम राज्य की वैश्विक विकास लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धताओं में किस प्रकार योगदान देते हैं।

सत्रों में राज्य बजट प्रक्रिया का भी अवलोकन प्रस्तुत किया गया, जिससे अधिकारियों को राज्य बजट की संरचना तथा उसके परिणामों, लक्ष्यों और प्रदर्शन मापन से संबंधों को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिली।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से चर्चा एवं अभ्यास सत्रों में भाग लिया। इस अवसर पर यह रेखांकित किया गया कि परिणाम आधारित बजटिंग केवल वित्तीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि “हम कितना खर्च करते हैं” से आगे बढ़कर “हमारे खर्च से क्या हासिल होता है” की सोच विकसित करने का परिवर्तन है।

विभागों को अपनी योजना एवं निगरानी गतिविधियों में इन सिद्धांतों को निरंतर अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया, ताकि सार्वजनिक व्यय विकास में निवेश का रूप ले सके और पारदर्शिता, जवाबदेही तथा नागरिक विश्वास को सुदृढ़ किया जा सके।

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