नीतिगत निर्णयों की रीढ़ है सटीक और एकीकृत डाटा प्रणाली : डॉ. अभिषेक जैन – भारत केसरी टीवी

नीतिगत निर्णयों की रीढ़ है सटीक और एकीकृत डाटा प्रणाली : डॉ. अभिषेक जैन

[MADAN SHARMA]

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आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की ओर से आज लाहौल-स्पीति जिला मुख्यालय केयलोंग में सांख्यिकीय सुदृढ़ीकरण सहयोग योजना के तहत एक कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का उद्देश्य राज्य की सांख्यिकीय गतिविधियों में समन्वय, पारदर्शिता और दक्षता को मजबूत करना था। यह कार्यशाला केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा प्रायोजित की गई।

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कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए वित्त, अर्थशास्त्र, सांख्यिकी एवं योजना सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने कहा कि सटीक और एकीकृत डाटा नीतिगत निर्णयों की रीढ़ है। सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों की सफलता डाटा की विश्वसनीयता, समयबद्धता और पारदर्शिता पर निर्भर करती है। सांख्यिकीय सूचकांक यह दर्शाते हैं कि लाहौल-स्पीति जिला विभिन्न विकास मानकों पर कहां खड़ा है और यह जिले की सामाजिक-आर्थिक प्रोफ़ाइल और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की स्थिति की झलक भी प्रदान करते हैं।

डॉ. जैन ने सभी विभागों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित डाटा का विस्तृत विश्लेषण करें ताकि विकास प्रवृत्तियों की पहचान की जा सके और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और नीति निर्माण को सशक्त बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि डाटा की सटीकता और विश्वसनीयता अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रशासनिक सुधारों और नीतिगत निर्णयों के वैज्ञानिक उपयोग में सहायक सिद्ध होता है।

उन्होंने जिले में पारदर्शिता, जवाबदेही और अपराध-मुक्त वातावरण बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन को बधाई दी और ई-ऑफिस प्रणाली एवं आधार नवीनीकरण प्रक्रिया में और सुधार लाने के निर्देश दिए।

डॉ. जैन ने प्रत्येक विभाग में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर जोर देते हुए कहा कि प्रमुख विकास आंकड़ों में सटीकता सुनिश्चित करने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं। उन्होंने स्थानीय उत्पादों, कृषि, बागवानी और हस्तशिल्प क्षेत्रों में प्रवृत्तियों के विश्लेषण और सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने प्रवासन, बागवानी, कृषि उत्पादन और हस्तशिल्प जैसे विषयों पर अध्ययन करने के लिए छोटे शोध समूह गठित करने का सुझाव दिया, साथ ही स्थानीय उत्पादों के विपणन और ब्रांडिंग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

उन्होंने प्रतिभागियों के मूल्यवान सुझावों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास राज्य की सांख्यिकीय प्रणाली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।

आर्थिक सलाहकार डॉ. विनोद राणा ने कहा कि डाटा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुगठित शासन प्रणाली की आधारशिला हैं।

उपायुक्त लाहौल-स्पीति किरण भदाना ने कहा कि डाटा-आधारित निर्णय-प्रक्रिया प्रशासनिक जवाबदेही को बढ़ाकर बेहतर परिणाम सुनिश्चित करती है, और ऐसी कार्यशालाएं स्थानीय स्तर पर डाटा संस्कृति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कार्यशाला के तकनीकी सत्र में जिला प्रोफाइल, जिला सुशासन सूचकांक (Good Governance Index) और राज्य सकल घरेलू उत्पाद (SGDP) के आकलन हेतु डाटा आवश्यकताओं पर प्रस्तुतियां दी गईं।

इस अवसर पर विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, सांख्यिकीय विशेषज्ञ और अन्य हितधारक उपस्थित रहे।


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