हिमाचल पुलिस का राज्यव्यापी “नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो” अभियान शुरू — 15 नवंबर को शिमला में वॉकथॉन का आयोजन – भारत केसरी टीवी

हिमाचल पुलिस का राज्यव्यापी “नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो” अभियान शुरू — 15 नवंबर को शिमला में वॉकथॉन का आयोजन

[MADAN SHARMA]

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शिमला, 4 नवंबर (मदन शर्मा )
हिमाचल प्रदेश पुलिस ने राज्यभर में युवाओं को नशे की लत से बचाने के उद्देश्य से “नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो” अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत 15 नवंबर को शिमला में भव्य वॉकथॉन आयोजित किया जाएगा, जिसमें आम जनता, छात्र, एनजीओ, एनसीसी/एनएसएस स्वयंसेवक और अधिकारी भाग लेंगे। कार्यक्रम का आयोजन रिज मैदान से विधानसभा चौड़ा मैदान तक किया जाएगा।

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पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने कहा कि राज्य में सिंथेटिक नशों, खासकर “चिट्टा” (हेरोइन का एक रूप) का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। यह नशा युवाओं के जीवन को बर्बाद कर रहा है और समाज के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024–25 में NDPS अधिनियम के अंतर्गत 1,300 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें अधिकांश “चिट्टा” से जुड़े हैं।

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हेरोइन का खतरनाक रूप “चिट्टा”
“चिट्टा” एक सफेद या हल्का भूरा पाउडर होता है, जिसमें डायसेटाइलमॉर्फिन (हेरोइन) के साथ अन्य रासायनिक पदार्थ मिलाए जाते हैं। इसे आमतौर पर स्मैक, ब्राउन शुगर या सिंथेटिक हेरोइन के नाम से भी जाना जाता है। यह सस्ता, अत्यधिक नशे की लत पैदा करने वाला और आसानी से उपलब्ध पदार्थ है, जो युवाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है।

राज्य में चिंताजनक हालात
तिवारी ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में चिट्टा से संबंधित मामलों में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9% की वृद्धि दर्ज की गई है।
शिमला, कांगड़ा, ऊना, सोलन और मंडी जिलों में नशे की प्रवृत्ति सबसे अधिक पाई गई है।
इस बढ़ती समस्या के प्रमुख कारण हैं — पड़ोसी राज्यों से तस्करी, बेरोज़गारी, साथियों का दबाव, सस्ती उपलब्धता और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार।

पुलिस की सख्त कार्रवाई और जन-जागरूकता पर जोर
हिमाचल पुलिस ने नशा तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने और जनता को जागरूक करने के लिए संयुक्त अभियान शुरू किया है। पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, और नशा नियंत्रण विभागों के साथ मिलकर काम कर रही है।
राज्यभर में वॉकथॉन और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि “नशामुक्त हिमाचल” का संदेश हर नागरिक तक पहुंचे।

NDPS अधिनियम के तहत सख्त सज़ा
राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के एएसपी नरवीर सिंह राठौर ने बताया कि NDPS अधिनियम, 1985 के तहत चिट्टा का रखना, बेचना या सेवन करना गंभीर अपराध है।
सज़ा का प्रावधान:

छोटी मात्रा (5 ग्राम तक): 1 वर्ष तक की कैद या ₹10,000 जुर्माना या दोनों

मध्यम मात्रा: 10 वर्ष तक की कैद और ₹1 लाख जुर्माना

व्यावसायिक मात्रा (250 ग्राम या अधिक): 10 से 20 वर्ष तक की कैद और ₹1–2 लाख तक का जुर्माना

उन्होंने कहा कि स्वेच्छा से इलाज के लिए आगे आने वाले व्यक्तियों को धारा 64-A के तहत पुनर्वास राहत दी जा सकती है।

“नशामुक्त हिमाचल” के तीन स्तंभ
एएसपी राठौर ने कहा — “कानून का सख्त पालन, जन-जागरूकता और पुनर्वास — यही नशामुक्त हिमाचल के तीन मजबूत स्तंभ हैं।”
उन्होंने जनता से अपील की कि नशे से जुड़ी किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें और इस सामाजिक मुहिम में सक्रिय भागीदारी निभाएं।#NashaMuktHimachal #DrugFreeHimachal | #Walkathon2025 | #SayNoToDrugs | #HimachalPoliceInitiative | #YouthForChange

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