डॉ. वाई.एस. परमार विश्वविद्यालय नौणी में ट्यूलिप-ऑर्किड फेस्टिवल, किसानों व छात्रों के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित – भारत केसरी टीवी

डॉ. वाई.एस. परमार विश्वविद्यालय नौणी में ट्यूलिप-ऑर्किड फेस्टिवल, किसानों व छात्रों के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित

[MADAN SHARMA]

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नौणी में ट्यूलिप एवं ऑर्किड महोत्सव सह पुष्प प्रदर्शनी आयोजित

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डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के फ्लोरीकल्चर एवं लैंडस्केपिंग विभाग द्वारा आज ट्यूलिप एवं ऑर्किड महोत्सव सह पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों, किसानों तथा पुष्प प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस महोत्सव का उद्देश्य फ्लोरीकल्चर को बढ़ावा देना, सजावटी पौधों की विविधता को प्रदर्शित करना तथा शोधकर्ताओं और किसानों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करना था। यह कार्यक्रम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा प्रायोजित परियोजना सजावटी पुष्प बल्बों के बड़े पैमाने पर उत्पादन हेतु नवाचारी प्रौद्योगिकियों का विकास एवं प्रसार: आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम’ के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसे फ्लोरीकल्चर पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के सहयोग से आयोजित किया गया।

इस अवसर पर उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। विश्वविद्यालय की निदेशक अनुसंधान डॉ. देविना वैद्य विशिष्ट अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम में उपस्थित रहीं।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने विश्वविद्यालय तथा फ्लोरीकल्चर एवं लैंडस्केपिंग विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विज्ञान, शिक्षा और किसानों के बीच की दूरी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विभाग के संकाय सदस्यों और शोधार्थियों की मेहनत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की भी प्रशंसा की, जो हिमाचल प्रदेश में व्यावसायिक फ्लोरीकल्चर तथा नवाचारी लैंडस्केप विकास के क्षेत्र में शिक्षण, अनुसंधान और प्रसार गतिविधियों को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने ऐसे लैंडस्केप की पर्यटन संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला तथा राज्य में इको-टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा देने के अवसरों का उल्लेख किया।

निदेशक अनुसंधान डॉ. देविना वैद्य ने अपने संबोधन में हिमालयी क्षेत्र में फ्लोरीकल्चर के विकास के लिए अनुसंधान और नवाचार के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ट्यूलिप और ऑर्किड राज्य के फ्लोरीकल्चर उद्योग के लिए अत्यंत संभावनाशील फसलें हैं तथा इन उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती है।

उत्सव के अंतर्गत किसानों के लिए आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए पुष्प सज्जा तथा फोटोग्राफी प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि द्वारा दो प्रकाशनों—‘नेटिव ऑर्नामेंटल्स’ पर आधारित टेबल कैलेंडर तथा ‘ट्यूलिप्स की सुंदरता’ नामक पुस्तिका—का भी विमोचन किया गया। इन प्रकाशनों में विश्वविद्यालय द्वारा फ्लोरीकल्चर के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों, विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्र में ट्यूलिप की खेती, प्रबंधन और सौंदर्यात्मक महत्व को रेखांकित किया गया है।

कार्यक्रम का समापन प्रधान फ्लोरीकल्चर विशेषज्ञ डॉ. बी. एस. दिल्टा द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस आयोजन से इन दोनों फूलों की संभावनाओं को प्रदर्शित करने में मदद मिलेगी और राज्य में फ्लोरीकल्चर उद्योग को सुदृढ़ करने में योगदान मिलेगा।

प्रधान अन्वेषक डॉ. पूजा शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय पिछले एक दशक से ट्यूलिप पर कार्य कर रहा है तथा ऑर्किड को भी व्यावसायिक फसल के रूप में प्रोत्साहित करने के लिए यहां शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि किसानों को प्रदर्शन और प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से हाल ही में 29 किस्मों के 4,000 से अधिक बल्ब लगाए गए हैं, जिन्हें आने वाले वर्षों में और विस्तार दिया जाएगा।

इस अवसर पर आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए व्यावसायिक फ्लोरीकल्चर पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव सिद्धार्थ आचार्य, डीन वानिकी महाविद्यालय डॉ चमन लाल ठाकुर सहित विभाग के संकाय और  प्रगतिशील किसान एवं छात्रों ने भाग लिया।

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