जोगिन्द्रा बैंक में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप, वकील ने RCS व NABARD को भेजी शिकायत – भारत केसरी टीवी

जोगिन्द्रा बैंक में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप, वकील ने RCS व NABARD को भेजी शिकायत

चंडीगढ़/सोलन भारत केसरी टीवी

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जोगिन्द्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक (JCCB) सोलन एक बार फिर विवादों में है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और हिमाचल हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने बैंक प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए पंजीयक सहकारी समितियाँ (RCS) शिमला को विस्तृत शिकायत भेजी है। शिकायत की प्रतियाँ NABARD और RBI को भी भेजी गई हैं।

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अधिवक्ता शर्मा का आरोप है कि बैंक ने 12 सितम्बर 2025 को जो HR/Posting (सीट रोटेशन) आदेश जारी किया, वह सिर्फ “नाबार्ड की जांच से बचने की कोशिश” थी। उनके अनुसार यह पूरा अभ्यास महज़ दिखावा था, ताकि बैंक में हुए कथित करोड़ों के घोटाले, फर्जी ट्रांजैक्शन और वित्तीय अनियमितताओं को छुपाया जा सके।

FIR में नामजद अधिकारी को ऑडिट सेक्शन का इंचार्ज बनाने का आरोप

शिकायत में दावा है कि बैंक के प्रबंध निदेशक पंकज सूद ने जानबूझकर राम पॉल (AGM) को ऑडिट सेक्शन का प्रभारी बनाया, जबकि राम पॉल JCCB सोलन से जुड़े दो FIR मामलों में जमानत पर हैं और इनके खिलाफ स्टेट विजिलेंस सोलन (FIR नं. 00003/2025) में जांच लंबित है।

वर्षों से एक ही पद पर जमे अधिकारी, रोटेशन नीति ध्वस्त

शिकायत के अनुसार बैंक में कई अधिकारी 3 से 13 साल से एक ही जगह तैनात हैं।

रविंद्र कुमार (बैच 1999) — 26 साल की नौकरी में लगभग 20 साल हेड ऑफिस में।

सुमन ठाकुर (KCCB से डेपुटेशन) — लगभग 10 साल से JCCB में ही तैनात, प्रमोशन लेकर फिर सांठगांठ से वापस डेपुटेशन पर लौट आईं।

सुमन ठाकुर वर्षों से अकाउंट्स रिकन्सिलेशन देख रही हैं, लेकिन CA ऑडिट रिपोर्ट (2023–24) के अनुसार अभी भी कई खाते रिकन्साइल नहीं किए गए हैं—जो बैंक की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है।

हेड ऑफिस में लंबे समय से टिके अन्य कर्मचारियों में
विक्रम चौहान, कैलाश शर्मा, रजनी शर्मा, कौशल चौहान, पोम पुरटा, पूजा ठाकुर, संदीप मेहता और मोहित ठाकुर के नाम भी शामिल किए गए हैं।

विवादित अधिकारियों को फिर संवेदनशील विभागों में तैनाती

अधिवक्ता शर्मा के अनुसार कई अधिकारी जिनके नाम ऑडिट रिपोर्ट में आपत्तियों से जुड़े हैं, उन्हें ही दोबारा ऑडिट, रिकवरी, लॉ, एस्टैब्लिशमेंट, CBS, PIO और विजिलेंस जैसे महत्वपूर्ण विभागों में बैठा दिया गया।
यह स्पष्ट हितों का टकराव और गंभीर गवर्नेंस फेलियर है।

“यह सिर्फ ट्रांसफर विवाद नहीं, पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल”

अधिवक्ता शर्मा का कहना है:

> “यह मामला केवल तबादला नीति के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंक की पूरी प्रशासनिक पारदर्शिता और ईमानदारी सवालों के घेरे में है। नाबार्ड और RCS को स्वतंत्र विजिलेंस जांच करवानी चाहिए।”

मांगी गई कार्रवाई

शिकायत में निम्न बिंदुओं की जांच की मांग की गई है—

मनमाने व पक्षपातपूर्ण तबादलों की जांच

ऑडिट रिपोर्ट की अनदेखी की जांच

वर्षों से हेड ऑफिस में जमे अधिकारियों की जवाबदेही

डेपुटेशन नीति के दुरुपयोग की समीक्षा

संभावित वित्तीय घोटालों और गबन की जांच

अधिवक्ता शर्मा के अनुसार यदि इन शिकायतों की जांच में सच्चाई निकलती है, तो इससे JCCB सोलन में फैले संगठित भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, ताकतवर अधिकारियों की साठगांठ और नीतिगत दुरुपयोग की जड़ें सामने आ सकती हैं। शिकायत ने इस मामले को राज्य विजिलेंस व सहकारी नियंत्रण प्राधिकरणों के रडार पर ला दिया है।

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