गाँवों को नगर निगम में शामिल करना जनविरोधी: तरसेम भारती ने सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग – भारत केसरी टीवी

गाँवों को नगर निगम में शामिल करना जनविरोधी: तरसेम भारती ने सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग

[ MADAN SHARMA]

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सोलन, दिनॉक: 2 अप्रैल 2026

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गाँवों को जबरन नगर क्षेत्र में शामिल करना जनविरोधी निर्णय — तरसेम भारती

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भारतीय जनता पार्टी प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष, अनुसूचित जाति मोर्चा, हिमाचल प्रदेश तरसेम भारती ने सोलन नगर क्षेत्र में गाँवों को जबरन नगर निगम में शामिल किए जाने के निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल अव्यवहारिक है अपितु गाँव और शहर दोनों के विकास को बाधित करने वाला है।

भारती ने कहा कि जिन ग्रामीण क्षेत्रों को ज़बरदस्ती नगर क्षेत्र में शामिल किया गया है, वहाँ आज भी न तो शहरी सुविधाएँ उपलब्ध हैं और न ही गाँवों की पारंपरिक विकास व्यवस्था जारी रह पा रही है। लोगों पर अनावश्यक टैक्सों का बोझ बढ़ा दिया गया है, जबकि बदले में उन्हें मूलभूत सुविधाएँ भी नहीं मिल रही हैं।

उन्होंने कहा कि शहर और गाँव की भौगोलिक स्थिति तथा आवश्यकताएँ पूरी तरह अलग होती हैं। ऐसे में बिना किसी ठोस योजना के इन क्षेत्रों को नगर क्षेत्र में जोड़ना केवल प्रशासनिक असंतुलन पैदा कर रहा है। नगर निगम का सीमित बजट पहले ही शहर की आवश्यकताओं को पूरा करने में चुनौती का सामना कर रहा है, ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के जुड़ने से यह बजट और अधिक बंट जाएगा, जिससे शहर के विकास कार्य भी प्रभावित होंगे।

भारती ने कहा कि इस निर्णय से न तो गाँवों का विकास हो पा रहा है और न ही शहर का। गाँवों के लिए आने वाले विशेष फ़ंड और योजनाएँ भी प्रभावित होंगी, जिससे ग्रामीण विकास पूरी तरह ठप पड़ने का खतरा उत्पन्न हो जायेगा। साथ ही ग्रामीण जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना पूरी तरह अनुचित है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि इन क्षेत्रों को पुनः गाँव के रूप में बहाल किया जाता है, तो इससे गाँव और शहर दोनों को लाभ होगा। गाँवों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार विकास का अवसर मिलेगा, वहीं शहर का बजट भी सुव्यवस्थित रूप से उपयोग हो सकेगा।

तरसेम भारती ने कहा कि वह शीघ्र ही गाँव और शहर के प्रतिनिधियों से विस्तृत बातचीत करेंगे तथा उनके साथ बैठक कर इस विषय पर ठोस रणनीति तैयार करेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि जनता की आवाज़ को सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जाएगा।

अंत में उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि इस जनविरोधी निर्णय को तुरंत वापस लिया जाए और ग्रामीण क्षेत्रों को पुनः उनके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए, ताकि संतुलित और समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके

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