कांग्रेस को राजनीति में विरोधाभास के अवशेष तलाशने की आदत। विवेक शर्मा भारतीय विदेश नीति अनुशासन, राष्ट्रवाद और दो पक्षीय संवाद की पहचान। विवेक शर्मा – भारत केसरी टीवी

कांग्रेस को राजनीति में विरोधाभास के अवशेष तलाशने की आदत। विवेक शर्मा भारतीय विदेश नीति अनुशासन, राष्ट्रवाद और दो पक्षीय संवाद की पहचान। विवेक शर्मा

शिमला ब्यूरो सुभाष शर्मा 15/5/25

सोलन :भाजपा प्रवक्ता विवेक शर्मा ने कांग्रेस द्वारा की जा रही टिप्पणियों पर प्रहार करते हुए कहा कि युद्ध विराम के पश्चात विश्व स्तरीय घटना के अवशेषों को भारत का विपक्ष जितनी तत्परता से तलाश रहा है उतनी तत्परता से हमले में मारे गए पाकिस्तानी दहशतगर्दो के अवशेष पाकिस्तान की सरकार भी नहीं ढूंढ रही।
भारतीय सेना के गौरव और अनुशासन पर टिप्पणी करने से बचता हुई विपक्ष अब एन.डी.ए की सरकार के ऊपर प्रश्न खड़े कर के राजनीति तलाश रही है।
भारत विश्व में राजनीतिक, आर्थिक और सैनिक शक्ति के लिए ही नहीं अपनी राजनीतिक अनुशासनता के लिए भी जाना जाता है
और भारत ने सदैव दो पक्षीय संवाद को महत्व दिया है । वह चाहे व्यापारिक हो या राजनीतिक या अंतरराष्ट्रीय संवाद।
भारतीय जनता पार्टी इस बात को सुनिश्चित करती है की दो पक्षीय बातचीत भारतीय विदेश नीति का अभिन्न स्तंभ है।
किसी अन्य राष्ट्र द्वारा हस्तक्षेप या टिप्पणी उसकी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं का हिस्सा हो सकती है या किसी को आश्वासन व स्वयं को खुश करने का नजरिया। शिमला समझौता दो राष्ट्रों के बीच में हुआ है । समझौते का उल्लंघन तो पाकिस्तान भी नहीं कर सकता। यह अलग बात है कि रोने के लिए वह कंधा किसी का भी तलाश सकता है। राष्ट्र के भीतर पनप रही देशद्रोही ताकतों को सहारा ना मिले यह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना देश के दुश्मन के साथ लड़ना । विपक्ष के हृदय में पनप रही राजनीति राष्ट्रभक्ति की सीमाओं को आघात ना करें यह विपक्ष को भी सुनिश्चित करना होगा। गत दिनों में जिस प्रकार एक विषेश समुदाय के लोगों द्वारा पाकिस्तान के पक्ष में कुछ टिप्पणियां सोशल मीडिया में आई है उन्हें तुष्टिकरण का सहारा ना मिले, जिम्मेदार विपक्ष को यह भी सुनिश्चित करना होगा। अति उत्साहित होकर
टिप्पणी करना और विवादित होना immature political act(अपरिपक्व राजनीतिक कृत) है ।राष्ट्रीय राजनीति नहीं विरोधियों की भावनाओं को मान्यता देने के समान है।
खुश फैहमी तो कांग्रेस को भी हैं कि एक दिन राहुल प्रधानमंत्री बनेंगे।
उस पर भी पूरा विश्व टिप्पणी नहीं करता है ।
किसी भारतीय नेता को पराठे से अच्छा पिज़्ज़ा लगता है तो उसकी निजी समस्या है। विवादित बयान बाजी राष्ट्रीय विरोधियों को प्रोत्साहित करती हैं।

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