गुठलीदार 85 और सेब के सिर्फ 50 फीसदी पौधे बिके, बागवानों को बर्फबारी का इंतजार – भारत केसरी टीवी

गुठलीदार 85 और सेब के सिर्फ 50 फीसदी पौधे बिके, बागवानों को बर्फबारी का इंतजार

लंबे सूखे के कारण नौणी विवि में भी फलदार पौधे नहीं बिक रहे हैं। बहुत कम किसान-बागवान ही पौधों की खरीद के लिए पहुंच रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश में लंबे सूखे के कारण नौणी विवि में भी फलदार पौधे नहीं बिक रहे हैं। बहुत कम किसान-बागवान ही पौधों की खरीद के लिए पहुंच रहे हैं। हालांकि गुठलीदार फलों की करीब 85 फीसदी बिक्री हो गई है। जबकि सेब की बिक्री सिर्फ 50 फीसदी तक ही हो पाई है। प्रदेश के किसान-बागवान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। नौणी विश्वविद्यालय ने नर्सरियों में अगल-अलग प्रकार के करीब 2.70 लाख पौधे तैयार किए थे और बिक्री के लिए रखे थे।

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इस बार अन्य वर्षों की अपेक्षा पहले ही बिक्री का कार्य शुरू कर दिया था। 11 दिसंबर से ही विवि द्वारा पौधे बिक्री का कार्य शुरु किया गया। विवि ने यहां फ्रूट साइंस विभाग, मॉडल फार्म व सीड साइंस की नर्सरी में पौधों की बिक्री की जा रही है। इसके अलावा केवीके सोलन में भी विभिन्न किस्मों के पौधे मौजूद हैं। अभी तक केवल 50 फीसदी पौधे ही बिक पाए हैं।

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नौणी विवि के फल विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. डीपी शर्मा ने बताया कि सूखे के चलते स्टोन फ्रूट्स के मुकाबले सेब के पौधों की बिक्री कम हुई है। कारण समय से बारिश बर्फबारी न होना है। अभी तक सेब के करीब 50 फीसदी पौधों की बिक्री हुई है और स्टोन फ्रूट करीब 85 फीसदी तक बिक चुका है। उनका कहना है कि किसान बागवान बारिश बर्फबारी होने का इंतजार कर रहे हैं।

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एक घनमीटर का बनाएं गड्ढा
जड़ों के विकास के लिए यह आवश्यक है कि उन्हें फैलने के लिए जरूरी स्थान और आहार मिले। इसलिए नियत स्थान पर एक घन मीटर का गड्ढा बनाएं। गड्ढे की मिट्टी को 10-12 दिन तक खुला रहने दें ताकि धूप लग सके। इससे हानिकारक जीवाणु तथा कीड़े नष्ट हो जाते हैं। पौधा लगाने से लगभग 15-20 दिन पहले गड्ढा मिट्टी से भरें और 20-30 किलोग्राम गली सड़ी गोबर की खाद तथा आधा किलोग्राम सुपर फास्फेट भी डालें। इसके बाद पानी डालें ताकि मिट्टी ठीक ढंग से बैठ जाए।

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