शिमला न्यूज : छठी बार जमानत याचिका खारिज हुई वन निगम के फर्जी डीएम की – भारत केसरी टीवी

शिमला न्यूज : छठी बार जमानत याचिका खारिज हुई वन निगम के फर्जी डीएम की

शिमला। प्रदेश की राजधानी शिमला में वन निगम का डीएम बनकर युवाओं से नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। अभी तक ठगी का शिकार हुए छह युवाओं की जानकारी पुलिस के पास पहुंची है। आरोपी ने ठगी से जुटाए गए धन से एक कार भी खरीदी। उसके बैंक खाते से 22 लाख रुपये भी बरामद किए गए हैं। पुलसि की जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है महाठग के कारनामों से पर्दे भी उठते जा रहे हैं।

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जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को युवाओं के सामने वन निगम के डीएम के रूप में पेश करता था। इसी तरह से उसने सचिवालय के उच्च अधिकारियों से जान पहचान का हवाला देकर 6 युवाओं से लाखों रुपये की राशि भी ऐंठी। इसी वर्ष 14 मई को उपमंडल रोहड़ू के रहने वाले दो भाईयों निशांत और रितिक के साथ वन विभाग में नौकरी लगवाने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया था।

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जांच आगे बढ़ी तो मामले में सुशांत, संजीव, भूपेंद्र और पुरुषोत्तम से भी ठगी की बात सामने आई। पुलिस के मुताबिक आरोपी किन्नौर के निचार का रहने वाले दलीप सिंह नेगी ने सह-आरोपी रितेश के साथ आपराधिक षडयंत्र रचकर इन युवाओं से ठगी की। खुद को डीएम बताकर जाली दस्तावेज तैयार करने के लिए आरोपी ने अपने मोबाइल फोन और लेपटॉप तथा प्रिंटर का इस्तेमाल किया और वह उन दस्तावेजों को व्हाट्सएप के माध्यम से अपने सह-आरोपी रितेश के साइबर कैफे पर भेजता था।

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सह-आरोपी रितेश इन दस्तावेजों पर वन विभाग का लोगों लगाकर उन्हें इंटरनेट से डाउनलोड करता था और आधार कार्ड पर नाम भी बदल देता था। जाली ज्वाइनिंग लेटर और एनसीसी सर्टिफिकेट तैयार कर जारी किए जाते थे। इसके बाद आरोपी दलीप सिंह फॉरेस्ट गार्ड के फर्जी नियुक्ति पत्र युवाओं को थमा देता था। इसकी एवज में आरोपी और सह-आरोपी रितेश को गूगल-पे के माध्यम से पैसे की अदायगी करता था।

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पुलिस ने आरोपी दलीप सिंह नेगी की कॉल डिटेल और उसके सह-आरोपी के बैंक खातों का विवरण प्राप्त किया। इस मामले की शिकायत पीड़ित भाइयों ने पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर की थी। इसमें बताया था कि 2024 में मार्च में आरोपी दलीप नेगी चिड़गांव के युवक निशांत के संपर्क में आया। निशांत सरकारी नौकरी की तलाश में था। आरोपी ने निशांत को वन विभाग में नौकरी दिलवाने की बात कही। इसके बाद आरोपी ने निशांत से पैसे ऐंठने शुरू किए। निशांत का जाली एनसीसी कैडेट्स का प्रमाण पत्र और नियुक्ति पत्र बनवाया और 15 मई को ज्वाइनिंग करने के लिए कहा। एक महीने में आरोपी ने निशांत से 8.63 लाख रुपये ऐंठे जिसके बाद पुलिस ने पीड़ित निशांत के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी।

जिला अदालत ने वन विभाग में नौकरी के नाम पर ठगी के मामले में आरोपी दलीप सिंह नेगी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। विशेष न्यायाधीश (सीबीआई) ने याचिकाकर्ता दलीप सिंह नेगी को जमानत पर रिहा करने से इन्कार किया है। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि आरोप-पत्र दाखिल करने की परिस्थिति बदल गई है इसलिए यह आवेदन खारिज करने योग्य है। बहस के बाद याचिका को खारिज कर दिया गया। आरोपी की जमानत याचिका छठी बार खारिज की है। छह महीने से आरोपी कैथू जेल में न्यायिक हिरासत में है।

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