आरडीजी बंद होने के बावजूद ओपीएस और जनकल्याणकारी योजनाएं जारी रहेंगी: मुख्यमंत्री – भारत केसरी टीवी

आरडीजी बंद होने के बावजूद ओपीएस और जनकल्याणकारी योजनाएं जारी रहेंगी: मुख्यमंत्री

[MADAN SHARMA]

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शिमला।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद किए जाने के बावजूद राज्य सरकार ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं को हर हाल में जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने संसाधनों को जुटाकर लोगों के अधिकारों और हकों की पूरी तरह रक्षा करेगी।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि भाजपा सत्ता में होती तो वह ओपीएस को समाप्त कर यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लागू कर देती, जिससे सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा खत्म हो जाती। एक सामान्य परिवार से आने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वे आम जनता की चिंताओं को भली-भांति समझते हैं और उनकी सरकार कभी भी जनता के हितों से समझौता नहीं करेगी।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने पूर्व भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2018 से 2021 के बीच वित्तीय कुप्रबंधन किया गया। उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार को अपने कार्यकाल में 54,000 करोड़ रुपये आरडीजी और 16,000 करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजा मिला, लेकिन इन संसाधनों का उपयोग स्थायी पूंजीगत ढांचा खड़ा करने के बजाय ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने में किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 1,000 करोड़ रुपये की इमारतें बनाई गईं जो आज भी खाली पड़ी हैं।

इसके विपरीत, मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार को पिछले तीन वर्षों में केवल 17,000 करोड़ रुपये आरडीजी मिला, इसके बावजूद सरकार ने कड़ा वित्तीय अनुशासन बनाए रखा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से 26,683 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है और आगे भी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत दिया जाता है और इसका बंद होना हिमाचल जैसे छोटे पर्वतीय राज्य के लिए गंभीर झटका है। उन्होंने चेताया कि हर साल करीब 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान राज्य के बजट को बुरी तरह प्रभावित करेगा। उन्होंने इसे केंद्र सरकार का हिमाचल के प्रति सौतेला व्यवहार करार दिया।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि वे स्वयं प्रधानमंत्री से मिलकर आरडीजी बहाल करने की मांग करेंगे और हिमाचल के हक के लिए हर मंच पर संघर्ष करेंगे। उन्होंने स्वयं को राज्य के अधिकारों के लिए योद्धा बताया।

नेता प्रतिपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने पत्रों की प्रतियां दिखाकर स्पष्ट किया कि भाजपा विधायकों को वित्तीय प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन उन्होंने जानबूझकर बैठक का बहिष्कार किया। उन्होंने भाजपा से अपील की कि राजनीति से ऊपर उठकर राज्य के हित में केंद्र सरकार के समक्ष हिमाचल का पक्ष मजबूती से रखा जाए।

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