मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा यह बताए कि प्रधानमंत्री जो 1500 करोड़ रुपये घोषित करके गए हैं, वह कब तक मिलेंगे। – भारत केसरी टीवी

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा यह बताए कि प्रधानमंत्री जो 1500 करोड़ रुपये घोषित करके गए हैं, वह कब तक मिलेंगे।

[MADAN SHARMA ]

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लंदन दौरे से लौटे मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू भाजपा पर हमलावर दिखे। सीएम ने कहा कि भाजपा यह बताए कि प्रधानमंत्री जो 1500 करोड़ रुपये घोषित करके गए हैं, वह कब तक मिलेंगे। जब हिमाचल प्रदेश दर्द से कराह रहा हो और आपदा से प्रभावित हो तो उसी समय यह फंड मिलना चाहिए। भाजपा के पास कोई मुद्दा नहीं है। कभी टॉयलेट टैक्स की बात करती है तो कभी कुछ और कहती है।

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सोमवार को शिमला में पत्रकारों से बातचीत में सुक्खू ने कहा कि विपक्ष सीमेंट पर टैक्स लगाने की बात कर रहा है। टैक्स नहीं लगा है। टैक्स लगाना कुछ और बात होती है। भाजपा पांच गुटों में बंटी है। इनका एक नेता कुछ बोलता है तो दूसरा कुछ और। प्रदेश में जीएसटी लगने से बहुत अधिक नुकसान हुआ है। जब 2017 में जीएसटी लगा तो उस समय बद्दी, नालागढ़ जैसे क्षेत्रों और पर्यटन के क्षेत्रों में 4,000 हजार करोड़ रुपये का वैट या आबकारी कर आता था। जीएसटी लगने के बाद यह डेढ़ सौ करोड़ रुपये मिल रहा है। वैट का नुकसान हुआ तो 2017 में हर साल 3200 करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजा देने की बात की गई और इसे दिया भी। जून 2022 में भाजपा की सरकार थी तो जीएसटी का मुआवजा बंद कर दिया। सीमेंट उद्योग से सबसे अधिक जीएसटी आता था।

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सुक्खू ने कहा कि वह एक बेटी के पिता भी हैं। बेटी ने दाखिले के लिए साथ चलने का अनुरोध किया। लंदन में भी हिमाचल के हितों की बात करता रहा। मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों से वह रोज बात करते रहे। मंत्रियों से भी उनकी बात होती रही। भाजपा को इस प्रकार की राजनीति नहीं करनी चाहिए। एयर टिकट से लेकर सारे खर्च खुद उठाए हैं।
सोमवार को शिमला में पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा यह बताए कि प्रधानमंत्री जो 1500 करोड़ रुपये घोषित करके गए हैं, वह कब तक मिलेंगे। पढ़ें पूरी खबर…
सीएम ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल का दौरा अभी अप्रूव नहीं किया गया है। सोशल मीडिया पर एक पत्र वायरल किया गया। जनता को पता चलना चाहिए कि एक्सपोजर टूअर पर कई बार विधायक या अधिकारी सरकारी दौरे पर जाते हैं, मगर इन दौरों को सरकार के साथ जोड़ दिया जाता है, जबकि इसमें विभिन्न प्रोजेक्टों का 10 प्रतिशत फंड इसी काम के लिए जाता है।
कांगड़ा सहकारी बैंक में पिछले सात-आठ साल से जो चल रहा था, बात ध्यान में आई तो बोर्ड को भंग कर दिया। लोग 40-40 करोड़ रुपये का लोन छोटी-छोटी चीजों पर ले रहे हैं। लोन लेकर वापस नहीं करते। चार करोड़ रुपये की कीमत दिखाते हैं। सेटलमेंट तो गरीब किसानों का होना चाहिए। वन टाइम सेटलमेंट में जो आएगा, उसे मिलेगा। कांगड़ा सहकारी बैंक मामले की ईडी जांच कर रही है। तथ्य सामने आएंगे।

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